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रमा एकादशी 2026: तिथि, व्रत कथा, पूजा विधि और महत्व

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भक्ति भावना प्रस्तुत रमा एकादशी 2026: संपूर्ण व्रत कथा, उत्पत्ति, महत्व, पूजा विधि और पारण कार्तिक कृष्ण एकादशी • श्रीहरि विष्णु और माँ लक्ष्मी की आराधना रमा एकादशी दीपावली से पहले आने वाला भगवान विष्णु की भक्ति का विशेष अवसर है। लेकिन इस दिन का नाम ‘रमा’ क्यों पड़ा? इसकी कथा किसने किसे सुनाई? राजा मुचुकुंद, राजकुमारी चंद्रभागा और शोभन के साथ क्या हुआ? मंदराचल पर्वत के दिव्य नगर का रहस्य क्या था? यहाँ शुरुआत से अंत तक सारी कथा क्रम से पढ़िए। चित्र 1 — रमा एकादशी का मुख्य परिचय रमा एकादशी क्या है और इसे ‘रमा’ क्यों कहते हैं? चंद्र मास में प्रत्येक पक्ष का ग्यारहवाँ दिन एकादशी कहलाता है। कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष—दोनों में एक-एक एकादशी होती है। वैष्णव परंपरा में ये तिथियाँ विशेष रूप से भगवान विष्णु के नाम-स्मरण, कथा-श्रवण, प्रार्थना और आत्मसंयम को समर्पित मानी जाती हैं। पूर्णिमांत पद्धति के अनुसार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी का नाम रमा एकादशी है। रमा, माता लक्ष्मी का प्रिय नाम है; इसलिए इस पर्व का संबंध श्रीहरि विष्णु के साथ माँ लक्ष्मी की आराधना से भी जोड़ा जाता है। अ...

गौधन का महत्व: धन के प्रकार, गौ माता की महिमा और सच्ची गौ-सेवा

॥ भक्ति भावना • गौधन विशेष चित्रमाला ॥ गौधन का महत्व: धन के अनेक रूप और गौ माता की सच्ची सेवा धन केवल रुपया-पैसा नहीं। जानिए गौधन की भारतीय परंपरा, ग्रामीण जीवन में उसका महत्व और गौ माता के प्रति हमारी जिम्मेदारी। रुपया-पैसा हमें साधन देता है, पर प्रेम, करुणा और सेवा जीवन को अर्थ देते हैं। इस लेख में आठ चित्रों के साथ जानेंगे: धन कितने प्रकार से समझा जा सकता है, गौधन प्राचीन भारत में क्यों महत्त्वपूर्ण था, गौ माता से जुड़ी मान्यताएँ क्या हैं और सच्ची गौ-सेवा कैसे की जाए। इस लेख में पढ़ें: 1. गौ माता : गौधन क्यों अनमोल है? 2. धन कितने प्रकार के होते हैं? 3. प्राचीन भारत में गौधन को संपत्ति क्यों माना गया? 4. जिसके पास गौधन है, वह किस अर्थ में धन्य है? 5. गौ माता क्या देती हैं? उपयोगिता से आगे का संबंध 6. गौधन का सम्मान कैसे करें? 7. सच्ची समृद्धि क्या है? 8. आओ गौधन का मान करें स्लाइड 1/8 गौ माता : गौधन क्यों अनमोल है? गौ माता और बछड़े का स्नेह: गौधन एक अनमोल संपदा — भक्ति भावना कैरोसेल, स्लाइड 1 गौधन हमारे जीवन में केवल एक पशु के रूप में नहीं, बल्कि पालन-पोषण, ग्रामीण जीवन...