स्तोत्र संग्रह | सम्पूर्ण स्तोत्र अर्थ सहित

॥ श्री हरिः • श्री गुरुभ्यो नमः ॥

स्तोत्र संग्रह

प्रमुख हिन्दू स्तोत्र • संस्कृत पाठ • सरल हिंदी अर्थ सहित
भक्ति भावना स्तोत्र संग्रह में भगवान श्रीराम, श्रीकृष्ण, भगवान विष्णु, हनुमान जी, भगवान शिव, माँ दुर्गा, माँ लक्ष्मी, माँ सरस्वती और श्री गणेश से संबंधित प्रमुख स्तोत्र सरल और व्यवस्थित रूप में उपलब्ध हैं।

हर स्तोत्र में जहाँ संभव है, मूल संस्कृत पाठ, सरल हिंदी भावार्थ, पाठ से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी और स्रोत-परंपरा को साफ रूप में प्रस्तुत किया गया है।

नीचे अपनी पसंद का स्तोत्र चुनकर पूरा पाठ पढ़ें।
वर्तमान संग्रह — 12 प्रमुख स्तोत्र

॥ सम्पूर्ण स्तोत्र सूची ॥

स्तोत्र 01

संकटमोचन हनुमानाष्टक

हनुमान जी की प्रसिद्ध अष्टक स्तुति, जिसमें उनके संकटमोचन स्वरूप का स्मरण किया गया है।

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स्तोत्र 02

श्री बजरंग बाण

हनुमान जी की प्रसिद्ध भक्तिपूर्ण स्तुति और प्रार्थना, सरल हिंदी अर्थ सहित।

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स्तोत्र 03

श्री राम रक्षा स्तोत्र

भगवान श्रीराम के नाम, स्वरूप और संरक्षणकारी भाव से युक्त प्रसिद्ध संस्कृत स्तोत्र।

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स्तोत्र 04

शिव ताण्डव स्तोत्र

भगवान शिव के विराट, तेजस्वी और ताण्डव स्वरूप की प्रसिद्ध संस्कृत स्तुति।

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स्तोत्र 05

शिव पंचाक्षर स्तोत्र

“नमः शिवाय” पंचाक्षर मंत्र के पाँच अक्षरों की महिमा का सुंदर स्तोत्र।

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स्तोत्र 06

दुर्गा सप्तश्लोकी

माँ दुर्गा की सात प्रसिद्ध स्तुतियों का संक्षिप्त और भक्तिपूर्ण पाठ।

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स्तोत्र 07

संकटनाशन गणेश स्तोत्र

भगवान श्री गणेश के द्वादश नामों से युक्त प्रसिद्ध नारद-प्रोक्त स्तोत्र।

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स्तोत्र 08

श्री राम स्तुति

“श्रीरामचन्द्र कृपालु भजु मन” से आरंभ होने वाली भगवान श्रीराम की प्रसिद्ध स्तुति।

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स्तोत्र 09

श्री कनकधारा स्तोत्र

माँ महालक्ष्मी को समर्पित प्रसिद्ध कनकधारा स्तोत्र का 21-श्लोक वाला प्रचलित पाठ।

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स्तोत्र 10

श्री सरस्वती स्तोत्र

ज्ञान, वाणी और विद्या की अधिष्ठात्री माँ सरस्वती की प्रसिद्ध स्तुति।

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स्तोत्र 11

श्री कृष्णाष्टकम

“वसुदेवसुतं देवं” से आरंभ होने वाला भगवान श्रीकृष्ण का प्रसिद्ध अष्टकम।

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स्तोत्र 12

श्री विष्णु सहस्रनाम स्तोत्र

भगवान विष्णु के सहस्र दिव्य नामों का महाभारत-परंपरा से प्रसिद्ध स्तोत्र। पाठ को सुविधा के लिए दो भागों में प्रस्तुत किया गया है।

स्तोत्र पाठ का भाव

सनातन परंपरा में स्तोत्र भगवान के नाम, गुण, स्वरूप और लीलाओं के श्रद्धापूर्ण स्मरण का माध्यम हैं।

पाठ करते समय केवल शब्दों की संख्या पर ध्यान देने के बजाय श्रद्धा, शुद्ध भाव, अर्थ को समझने का प्रयास, सदाचार और भगवान के प्रति समर्पण को महत्व देना चाहिए।

अलग-अलग परंपराओं और प्रकाशित पुस्तकों में कुछ स्तोत्रों के शब्द, श्लोक क्रम या फलश्रुति में छोटे पाठभेद मिल सकते हैं। भक्ति भावना पर जहाँ आवश्यक हो, ऐसे पाठभेदों की जानकारी संबंधित स्तोत्र के भीतर दी गई है।

भक्ति भावना
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