संकटनाशन गणेश स्तोत्र अर्थ सहित | सम्पूर्ण Sankat Nashan Ganesh Stotra

॥ श्री गणेशाय नमः ॥

संकटनाशन गणेश स्तोत्र

सम्पूर्ण संस्कृत पाठ • सरल हिंदी भावार्थ
संकटनाशन गणेश स्तोत्र भगवान श्रीगणेश की प्रसिद्ध संस्कृत स्तुति है।

इस स्तोत्र में भगवान गणेश के बारह दिव्य नामों — वक्रतुण्ड, एकदन्त, कृष्णपिङ्गाक्ष, गजवक्त्र, लम्बोदर, विकट, विघ्नराजेन्द्र, धूम्रवर्ण, भालचन्द्र, विनायक, गणपति और गजानन — का स्मरण किया गया है।

प्रचलित पाठ की शुरुआत “नारद उवाच” से होती है। नीचे सभी आठ श्लोक सरल हिंदी भावार्थ सहित दिए गए हैं।

॥ संकटनाशन गणेश स्तोत्रम् ॥

॥ नारद उवाच • श्लोक 1 ॥

प्रणम्य शिरसा देवं गौरीपुत्रं विनायकम् ।
भक्तावासं स्मरेन्नित्यं आयुःकामार्थसिद्धये ॥1॥

सरल भावार्थ
नारद जी कहते हैं— मस्तक झुकाकर माता गौरी के पुत्र भगवान विनायक को प्रणाम करें।

भक्तों के हृदय में निवास करने वाले भगवान गणेश का नित्य श्रद्धापूर्वक स्मरण करना चाहिए और जीवन में कल्याणकारी उद्देश्यों की पूर्ति के लिए उनकी कृपा की प्रार्थना करनी चाहिए।
॥ श्लोक 2 ॥

प्रथमं वक्रतुण्डं च एकदन्तं द्वितीयकम् ।
तृतीयं कृष्णपिङ्गाक्षं गजवक्त्रं चतुर्थकम् ॥2॥

सरल भावार्थ
भगवान गणेश का पहला नाम वक्रतुण्ड, दूसरा एकदन्त, तीसरा कृष्णपिङ्गाक्ष और चौथा गजवक्त्र है।

ये नाम भगवान गणेश के विभिन्न दिव्य स्वरूप और विशेषताओं का स्मरण कराते हैं।
॥ श्लोक 3 ॥

लम्बोदरं पञ्चमं च षष्ठं विकटमेव च ।
सप्तमं विघ्नराजेन्द्रं धूम्रवर्णं तथाष्टमम् ॥3॥

सरल भावार्थ
भगवान गणेश का पाँचवाँ नाम लम्बोदर, छठा विकट, सातवाँ विघ्नराजेन्द्र और आठवाँ धूम्रवर्ण है।

इन नामों के माध्यम से भगवान गणेश के विशाल, समर्थ और विघ्नों पर विजय दिलाने वाले स्वरूप का स्मरण होता है।
॥ श्लोक 4 ॥

नवमं भालचन्द्रं च दशमं तु विनायकम् ।
एकादशं गणपतिं द्वादशं तु गजाननम् ॥4॥

सरल भावार्थ
नौवाँ नाम भालचन्द्र, दसवाँ विनायक, ग्यारहवाँ गणपति और बारहवाँ गजानन है।

इन बारह नामों के स्मरण से भक्त भगवान गणेश के विविध दिव्य गुणों का ध्यान करता है।

🌺 भगवान गणेश के 12 पवित्र नाम

1. वक्रतुण्ड
2. एकदन्त
3. कृष्णपिङ्गाक्ष
4. गजवक्त्र
5. लम्बोदर
6. विकट
7. विघ्नराजेन्द्र
8. धूम्रवर्ण
9. भालचन्द्र
10. विनायक
11. गणपति
12. गजानन
॥ श्लोक 5 ॥

द्वादशैतानि नामानि त्रिसंध्यं यः पठेन्नरः ।
न च विघ्नभयं तस्य सर्वसिद्धिकरः प्रभुः ॥5॥

सरल भावार्थ
परंपरागत फलश्रुति के अनुसार जो व्यक्ति भगवान गणेश के इन बारह नामों का तीनों संध्याओं में श्रद्धापूर्वक स्मरण करता है, वह विघ्नों के भय से ऊपर उठने की प्रेरणा पाता है।

भगवान गणेश को सभी शुभ कार्यों में मार्गदर्शक और विघ्नहर्ता माना गया है।
॥ श्लोक 6 ॥

विद्यार्थी लभते विद्यां धनार्थी लभते धनम् ।
पुत्रार्थी लभते पुत्रान्मोक्षार्थी लभते गतिम् ॥6॥

सरल भावार्थ
फलश्रुति में कहा गया है कि विद्या चाहने वाला विद्या, समृद्धि चाहने वाला समृद्धि, संतान की कामना करने वाला संतान और मोक्ष की इच्छा रखने वाला आध्यात्मिक गति प्राप्त करता है।

यह पारंपरिक धार्मिक फलवचन है; इसका मूल भाव श्रद्धा, परिश्रम और गणेश-कृपा की प्रार्थना है।
॥ श्लोक 7 ॥

जपेद्गणपतिस्तोत्रं षड्भिर्मासैः फलं लभेत् ।
संवत्सरेण सिद्धिं च लभते नात्र संशयः ॥7॥

सरल भावार्थ
इस श्लोक में नियमित और श्रद्धापूर्ण साधना की महिमा बताई गई है।

परंपरागत फलश्रुति में निश्चित अवधि तक गणपति स्तोत्र के जप के विशेष फल बताए गए हैं। आध्यात्मिक दृष्टि से इसका संदेश नियमितता, धैर्य और भक्ति में निरंतरता है।
॥ श्लोक 8 ॥

अष्टेभ्यो ब्राह्मणेभ्यश्च लिखित्वा यः समर्पयेत् ।
तस्य विद्या भवेत्सर्वा गणेशस्य प्रसादतः ॥8॥

सरल भावार्थ
परंपरागत फलश्रुति में कहा गया है कि जो इस स्तोत्र को लिखकर आठ ब्राह्मणों को अर्पित करता है, उसे भगवान गणेश की कृपा से विद्या प्राप्त होती है।

इसका व्यापक भाव ज्ञान का सम्मान, धार्मिक साहित्य का प्रसार और भगवान गणेश की कृपा की कामना है।

॥ इति श्रीनारदपुराणे
संकटनाशनं गणेशस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥

॥ श्री गणेशाय नमः ॥

🌺 संकटनाशन गणेश स्तोत्र का मूल भाव

इस स्तोत्र का मुख्य केंद्र भगवान गणेश के बारह पवित्र नामों का स्मरण है।

वक्रतुण्ड से लेकर गजानन तक प्रत्येक नाम भगवान गणेश के किसी विशेष स्वरूप और गुण की याद दिलाता है।

भगवान गणेश को सनातन परंपरा में शुभारंभ, बुद्धि, विवेक और विघ्नों को दूर करने वाले देवता के रूप में स्मरण किया जाता है।

इस स्तोत्र का सुंदर आध्यात्मिक संदेश है— किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत विनम्रता, स्पष्ट बुद्धि, धैर्य और ईश्वर-स्मरण के साथ करें।

पाठ संबंधी टिप्पणी: संकटनाशन गणेश स्तोत्र के अलग-अलग प्रकाशित संस्करणों में कुछ शब्दों में छोटे पाठभेद मिलते हैं, जैसे “भक्तावासं” आदि। यहाँ प्रचलित संस्कृत पाठ रखा गया है।

प्रचलित पाठ स्वयं अंत में इसे “श्रीनारदपुराणे संकटनाशनं गणेशस्तोत्रम्” कहता है। अलग पाठ-संकलनों में इसके स्रोत-संबंधी विवरण पर मतभेद भी मिलते हैं, इसलिए इसे यहाँ परंपरागत attribution के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

फलश्रुति में बताए गए लाभ धार्मिक आस्था और परंपरा के कथन हैं; उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य, धन या अन्य परिणाम की निश्चित गारंटी न समझें।
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॥ गणपति बप्पा मोरया • श्री गणेशाय नमः ॥

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