श्री बजरंग बाण अर्थ सहित | सम्पूर्ण पाठ और सरल हिंदी भावार्थ
श्री बजरंग बाण
इसमें भक्त हनुमान जी के रामायण से जुड़े पराक्रमों का स्मरण करते हुए उनसे साहस, रक्षा, धैर्य और संकट में सहायता की प्रार्थना करता है।
नीचे श्री बजरंग बाण का सम्पूर्ण पाठ और उसके साथ सरल हिंदी भावार्थ दिया गया है।
॥ श्री बजरंग बाण ॥
निश्चय प्रेम प्रतीति ते, विनय करैं सनमान ।
तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करें हनुमान ॥
जय हनुमन्त संत हितकारी ।
सुन लीजै प्रभु अरज हमारी ।।
जन के काज बिलम्ब न कीजै ।
आतुर दौरि महासुख दीजै ।।
भक्त प्रार्थना करता है कि उसके धर्मपूर्ण कार्यों में अनावश्यक विलंब न हो और उसे धैर्य तथा सहायता प्राप्त हो।
जैसे कूदी सिन्धु महि पारा ।
सुरसा बदन पैठी विस्तारा ।।
आगे जाय लंकिनी रोका ।
मारेहु लात गई सुर लोका ।।
भक्त उनके साहस, बुद्धि और लक्ष्य के प्रति अटल निष्ठा को याद करता है।
जाय विभीषण को सुख दीन्हा ।
सीता निरखि परम-पद लीना ।।
बाग उजारि सिन्धु मह बोरा ।
अति आतुर जमकातर तोरा ।।
इन प्रसंगों में उनका उद्देश्य केवल श्रीराम का कार्य पूरा करना और माता सीता को प्रभु का संदेश देना था।
अक्षय कुमार मारि संहारा ।
लूम लपेटि लंक को जारा ।।
लाह समान लंक जरि गई ।
जय-जय धुनि सुरपुर में भई ।।
भक्त हनुमान जी के उस अद्भुत पराक्रम को याद करता है जिससे रावण की शक्ति और अहंकार को बड़ी चुनौती मिली।
अब बिलम्ब केहि कारन स्वामी ।
कृपा करहु उर अन्तर्यामी ।।
जय जय लखन प्रान के दाता ।
आतुर होई दु:ख करहु निपाता ।।
लक्ष्मण जी के संकट के समय संजीवनी लाने वाले हनुमान जी का स्मरण करके भक्त उनके करुणामय सेवाभाव को याद करता है।
जै गिरिधर जै जै सुख सागर ।
सुर-समूह-समरथ भट-नागर॥
ओम हनु हनु हनु हनुमंत हठीले ।
बैरिहि मारु बज्र की कीले॥
आगे की पंक्तियाँ पारंपरिक वीर-भाव की प्रार्थना हैं, जिनमें भक्त अपने विरोध, भय और बाधाओं से रक्षा की प्रार्थना करता है।
गदा बज्र लै बैरिहि मारो ।
महाराज प्रभु दास उबारो ।।
ओंकार हुंकार महाप्रभु धाओ ।
बज्र गदा हनु विलम्ब न लाओ ।।
मुख्य भाव है— भक्त स्वयं को हनुमान जी का सेवक मानकर उनसे शीघ्र सहायता और साहस की प्रार्थना करता है।
ओम ह्नीं ह्नीं ह्नीं हनुमंत कपीसा ।
ओम हुं हुं हुं हनु अरि उर-सीसा॥
सत्य होहु हरी शपथ पायके ।
राम दूत धरु मारू जायके
भक्त उन्हें श्रीराम का दूत मानकर अपने जीवन की नकारात्मक बाधाओं के सामने साहस और दृढ़ता देने की प्रार्थना करता है।
जय जय जय हनुमन्त अगाधा ।
दुःख पावत जन केहि अपराधा ।।
पूजा जप-तप नेम अचारा ।
नहिं जानत हो दास तुम्हारा ।।
मैं केवल स्वयं को आपका सेवक मानकर आपकी शरण और कृपा चाहता हूँ।
वन उपवन मग गिरि गृह मांहीं ।
तुम्हरे बल हम डरपत नाहीं ।।
पायं परौं कर जोरी मनावौं ।
येहि अवसर अब केहि गोहरावौं ।।
वह हाथ जोड़कर कहता है— इस कठिन समय में आपके अतिरिक्त मैं किसे पुकारूँ?
जय अंजनी कुमार बलवंता ।
शंकर सुवन वीर हनुमंता ।।
बदन कराल काल कुलघालक।
राम सहाय सदा प्रतिपालक ।।
वे श्रीराम के परम सेवक हैं और भक्त उन्हें धर्म तथा सत्य के पक्ष में सदैव खड़े रहने वाले महान रक्षक के रूप में स्मरण करता है।
भूत प्रेत पिसाच निसाचर।
अगिन वैताल काल मारी मर ।।
इन्हें मारु, तोहि शपथ राम की ।
राखउ नाथ मरजाद नाम की ।।
भक्त श्रीराम के नाम का स्मरण करके हनुमान जी से भय दूर करने और मन में साहस देने की विनती करता है।
जनकसुता हरि दास कहावो ।
ताकी शपथ विलम्ब न लावो ।।
जै जै जै धुनि होत अकासा ।
सुमिरत होत दुसह दुःख नासा ।।
हनुमान जी का स्मरण कठिन समय में भक्त को आशा, विश्वास और मानसिक बल देता है।
चरण शरण कर जोरि मनावौं ।
यहि अवसर अब केहि गोहरावौं ।।
उठु उठु चलु तोहि राम-दोहाई ।
पायँ परौं, कर जोरि मनाई ।।
श्रीराम के नाम की दुहाई देकर वह अपनी प्रार्थना स्वीकार करने की विनती करता है।
ओम चं चं चं चं चपल चलंता ।
ओम हनु हनु हनु हनु हनुमन्ता ।।
ओम हं हं हाँक देत कपि चंचल ।
ओम सं सं सहमि पराने खल-दल ।।
भक्त हनुमान जी की तीव्र गति, साहस और दुष्ट प्रवृत्तियों के सामने निर्भीकता का स्मरण करता है।
अपने जन को तुरत उबारौ ।
सुमिरत होय आनंद हमारौ ।।
यह बजरंग बाण जेहि मारै।
ताहि कहो फिर कोन उबारै ।।
अगली पंक्तियाँ बजरंग बाण की पारंपरिक भक्ति-परंपरा में मानी जाने वाली शक्ति का वर्णन करती हैं।
पाठ करै बजरंग बाण की ।
हनुमत रक्षा करैं प्रान की ।।
यह बजरंग बाण जो जापैं ।
ताते भूत-प्रेत सब कापैं ।।
यहाँ “भूत-प्रेत” आदि का उल्लेख पारंपरिक धार्मिक भाषा में भय और अशुभ शक्तियों के प्रतीक के रूप में भी समझा जाता है।
धूप देय अरु जपै हमेशा ।
ताके तन नहिं रहै कलेसा ।।
इसका मुख्य भाव है कि भक्त हनुमान जी का स्मरण करते हुए अपने मन में विश्वास, अनुशासन और साहस बनाए रखे।
प्रेम प्रतीतिहि कपि भजै, सदा धरै उर ध्यान ।
तेहि के कारज सकल सुभ, सिद्ध करैं हनुमान ।।
उसके शुभ कार्यों में हनुमान जी की कृपा, साहस और प्रेरणा का आश्रय माना गया है।
🌺 बजरंग बाण का मूल भाव
बजरंग बाण की भाषा में प्रबल वीर-रस,
आर्त पुकार और पूर्ण शरणागति दिखाई देती है।
भक्त हनुमान जी के समुद्र-लाँघने,
लंका प्रवेश, माता सीता की खोज,
लंका-दहन और लक्ष्मण जी के संकट जैसे प्रसंगों का स्मरण करके
उनके साहस और सेवाभाव से प्रेरणा लेता है।
इस पाठ का भाव केवल संकट से बचने की इच्छा नहीं,
बल्कि कठिन समय में श्रीराम-भक्ति,
विश्वास, साहस और सेवा-भाव बनाए रखना भी है।
भक्ति संबंधी सूचना: धार्मिक पाठ श्रद्धा और आध्यात्मिक अभ्यास का विषय हैं। इन्हें किसी बीमारी, कानूनी, आर्थिक या अन्य व्यावहारिक समस्या के निश्चित समाधान की गारंटी के रूप में नहीं देखना चाहिए।
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