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ॐ श्री सीताराम • जय हनुमान ॐ

भक्ति भावना

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भक्ति से जीवन तक

🙏 भक्तिप्रभु के नाम, पाठ और स्मरण से श्रद्धा को जीवन से जोड़ना।
📚 ज्ञानसनातन विषयों को सरल, स्पष्ट और सुव्यवस्थित रूप में समझाना।
❤️ संस्कारसेवा, संयम, सदाचार और अच्छे विचारों को महत्व देना।
🌿 संस्कृतिभारतीय सनातन परंपरा और धार्मिक संस्कृति को आगे पहुँचाना।
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भक्ति भावना पर हाल ही में प्रकाशित लेख और धार्मिक सामग्री

ऐतरेयोपनिषद् सम्पूर्ण — तीनों अध्याय, सभी 33 मंत्र और सरल हिंदी अर्थ

भक्ति भावना प्रस्तुत · ऋग्वेदीय आत्मविद्या ऐतरेयोपनिषद् सम्पूर्ण मूल पाठ और प्रत्येक मंत्र का सरल हिंदी अर्थ एक ही लेख में 3 अध्याय · 5 खण्ड 33 मूल मंत्र ऐतरेयोपनिषद् ऋग्वेद से सम्बद्ध प्रमुख उपनिषद् है। यह ऐतरेय आरण्यक के दूसरे आरण्यक के चौथे, पाँचवें और छठे अध्याय में आता है। इसमें आत्मा से सृष्टि, इन्द्रियों और देवशक्तियों का सम्बन्ध, अन्न का महत्त्व, जीव के तीन जन्म और प्रज्ञानस्वरूप ब्रह्म का विवेचन है। इसका प्रसिद्ध महावाक्य है— प्रज्ञानं ब्रह्म । पढ़ने की व्यवस्था: पहले अध्याय के तीन खण्डों में क्रमशः 4, 5 और 14 मंत्र हैं; दूसरे अध्याय में 6 तथा तीसरे में 4 मंत्र—कुल 33। सभी इसी लेख में पूरे हैं। दूसरे और तीसरे अध्याय को यहाँ एक-एक खण्ड की तरह रखा गया है। संकेत 1.3.5 का अर्थ पहला अध्याय, तीसरा खण्ड, पाँचवाँ मंत्र है। शांतिपाठ मुख्य 33 मंत्रों से अलग है। विषय-सूची शांतिपाठ और अर्थ अध्याय 1, खण्ड 1 · आत्मा, लोक और देवशक्तियों का प्राकट्य · 4 मंत्र अध्याय 1, खण्ड 2 · देवशक्तियों का देह में प्रवेश · 5 मंत्र अध्याय 1, खण्ड 3 · अन्न, इन्द्रियाँ और आत्मा का प्रवेश · 14 मंत्र...

तैत्तिरीयोपनिषद् सम्पूर्ण — तीनों वल्लियाँ, सभी 31 अनुवाक और सरल हिंदी अर्थ

भक्ति भावना प्रस्तुत · कृष्णयजुर्वेदीय ब्रह्मविद्या तैत्तिरीयोपनिषद् सम्पूर्ण तीनों वल्लियों का मूल पाठ और सरल हिंदी अर्थ एक ही लेख में 3 वल्लियाँ 31 अनुवाक तैत्तिरीयोपनिषद् कृष्णयजुर्वेद की तैत्तिरीय शाखा से सम्बद्ध प्रमुख उपनिषद् है। यह तैत्तिरीय आरण्यक के सातवें, आठवें और नवें प्रपाठक में आता है। इसकी तीन वल्लियाँ हैं—शिक्षावल्ली, ब्रह्मानन्दवल्ली और भृगुवल्ली। शुद्ध उच्चारण और सदाचार से आरम्भ होकर इसका विवेचन अन्न, प्राण, मन, विज्ञान और आनन्द के द्वारा ब्रह्मज्ञान की ओर बढ़ता है। पढ़ने की व्यवस्था: शिक्षावल्ली के 12, ब्रह्मानन्दवल्ली के 9 और भृगुवल्ली के 10—कुल 31 अनुवाक इसी लेख में पूरे हैं। हर अनुवाक के नीचे सरल हिंदी अर्थ है। भीतर दिए मूल पाठ के छोटे क्रमांक अनुवाक के अन्दर के पाठ-खण्ड हैं; उन्हें कुल अनुवाकों की संख्या न समझें। 2.8 का अर्थ दूसरी वल्ली का आठवाँ अनुवाक है। विषय-सूची शिक्षावल्ली · 12 अनुवाक ब्रह्मानन्दवल्ली · 9 अनुवाक भृगुवल्ली · 10 अनुवाक पंचकोश का सरल परिचय कठिन शब्दों के अर्थ मूल स्रोत और संपादकीय टिप्पणी ॐ श्री गुरुभ्यो नमः । हरिः ॐ । वल्ली 1 · शिक्ष...

माण्डूक्योपनिषद् सम्पूर्ण — सभी 12 मंत्र, ॐ और आत्मा के चार पाद का सरल हिंदी अर्थ

भक्ति भावना प्रस्तुत · अथर्ववेदीय उपनिषद् माण्डूक्योपनिषद् सम्पूर्ण मूल पाठ और प्रत्येक मंत्र का सरल हिंदी अर्थ एक ही लेख में 12 मूल मंत्र ॐ · आत्मा · तुरीय माण्डूक्योपनिषद् अथर्ववेद से सम्बद्ध संक्षिप्त और गहन उपनिषद् है। केवल 12 मंत्रों में यह ओंकार, आत्मा और अनुभव की अवस्थाओं का विवेचन करता है। इसका प्रसिद्ध वाक्य है— अयमात्मा ब्रह्म । जाग्रत, स्वप्न और सुषुप्ति को समझाते हुए यह उस अद्वैत आत्मसत्य की ओर संकेत करता है जिसे चतुर्थ या तुरीय कहा जाता है। इसे मांडूक्य उपनिषद् भी लिखा जाता है। पढ़ने की व्यवस्था: सभी 12 मूल मंत्र और उनके अर्थ इसी पोस्ट में हैं। गौड़पादाचार्य की माण्डूक्यकारिका एक अलग व्याख्यात्मक रचना है; उसे इन 12 मूल मंत्रों की गिनती में सम्मिलित नहीं किया गया है। विषय-सूची आरम्भिक शांतिपाठ मंत्र 1 · ॐ और समस्त अस्तित्व मंत्र 2 · अयमात्मा ब्रह्म मंत्र 3 · जाग्रत · वैश्वानर मंत्र 4 · स्वप्न · तैजस मंत्र 5 · सुषुप्ति · प्राज्ञ मंत्र 6 · कारण स्वरूप और अन्तर्यामी मंत्र 7 · तुरीय · शान्त, शिव और अद्वैत मंत्र 8 · आत्मा और ओंकार की मात्राएँ मंत्र 9 · अकार और जाग्...

लोकप्रिय भक्ति सामग्री

ओ मेरे रघुवर तू ही सहारा है | राम भजन लिरिक्स | Bhakti Bhavna

श्रीरामचरितमानस की 24 प्रसिद्ध चौपाइयाँ | सरल अर्थ सहित

जय जय गिरिवरराज किशोरी | सीता जी की गौरी स्तुति | रामचरितमानस अर्थ सहित

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हर घर में प्रभु का नाम हो, हर मन में भक्ति हो, हर जीवन में अच्छे संस्कार हों और हमारी सनातन संस्कृति आने वाली पीढ़ियों तक प्रेम और सम्मान के साथ पहुँचती रहे। भक्ति भावना इसी संकल्प की एक छोटी-सी डिजिटल यात्रा है।