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महर्षि वाल्मीकि जयंती: आदिकवि का जीवन, रामायण की रचना, प्रथम श्लोक और लव-कुश की कथा

चित्र
॥ भक्ति भावना प्रस्तुत • आदिकवि वाल्मीकि विशेष ॥ महर्षि वाल्मीकि जयंती: आदिकवि का जीवन, रामायण की रचना, करुणा का प्रथम श्लोक और लव-कुश की कथा भारतीय काव्य-परंपरा में महर्षि वाल्मीकि को आदिकवि और संस्कृत रामायण का रचयिता माना जाता है। सात चित्रों के माध्यम से उनके व्यक्तित्व, करुणा, काव्य, श्रीराम के आदर्श और रामायण की मौखिक परंपरा को समझिए। परिचय रामायण जीवन-संदेश प्रथम श्लोक लव-कुश जयंती चित्र 1/7 — महर्षि वाल्मीकि जयंती • आदिकवि और रामायण के रचयिता 1. महर्षि वाल्मीकि कौन थे? महर्षि वाल्मीकि भारतीय ऋषि, कवि और आध्यात्मिक साहित्य की परंपरा में अत्यंत आदरणीय हैं। वाल्मीकि रामायण के प्रारंभिक सर्गों में वे ऐसे मुनि के रूप में दिखाई देते हैं जो नारद से आदर्श मनुष्य के गुण पूछते हैं, रामकथा सुनते हैं और फिर उसे काव्य में व्यक्त करते हैं। लोकपरंपराओं में उनके जीवन के अनेक प्रेरक आख्यान मिलते हैं। उन कथाओं का सांस्कृतिक महत्व है, लेकिन उनके जीवन का प्रत्येक लोकप्रिय विवरण समान स्तर के प्राचीन पाठ-साक्ष्य से प्रमाणित नहीं है। इसलिए मूल वाल्मीकि रामायण में वर्ण...

श्रीमद्भागवत महापुराण पंचम स्कन्ध भाग 4 — अध्याय 18–19, भक्तों की स्तुतियाँ और भारतवर्ष की महिमा

॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ श्रीकृष्णार्पणमस्तु ॥ श्रीमद्भागवत महापुराण पंचम स्कन्ध • भाग 4 अध्याय 18–19 • भक्तों की स्तुतियाँ, हनुमानजी की श्रीराम-स्तुति और भारतवर्ष की महिमा 70 क्रमाङ्कित मूल पाठ • प्रत्येक का सरल हिंदी भावार्थ पिछले भाग में जम्बूद्वीप, मेरु और गंगा की दिव्य धाराओं का वर्णन पढ़ा। इस भाग में विभिन्न वर्षों में भगवान के स्वरूपों की उपासना, प्रह्लादजी की मंगलकामना, लक्ष्मीजी की प्रार्थना, मत्स्य-कूर्म-वराह स्तुतियाँ, हनुमानजी की श्रीराम-स्तुति और नारदजी की नर-नारायण उपासना का पाठ है। इसके बाद भारतवर्ष के पर्वतों, नदियों और मानव जन्म में भगवद्भक्ति के अवसर की महिमा आती है। पाठ का संदर्भ: “वर्ष” शब्द यहाँ भू-प्रदेश के अर्थ में प्रयुक्त है। दिव्य लोकों, यज्ञफल और विश्वविभाग का वर्णन पुराण के उपासना-संदर्भ में पढ़ें। मूल मन्त्र यथापाठ दिए गए हैं; हिंदी में उनका सरल भाव समझाया गया है। इस भाग में पढ़ें अध्याय 18 — विभिन्न वर्षों में भगवान की उपासना • 39 मूल पाठ अध्याय 19 — हनुमानजी की श्रीराम-स्तुति और भारतवर्ष की महिमा • 31 मूल पाठ पंचम स्कन्ध • अध्याय 18 विभिन्न वर्षों में भगवान की...

श्रीमद्भागवत महापुराण पंचम स्कन्ध भाग 3 — अध्याय 16–17, भुवनकोश और गंगा महिमा

॥ श्रीगणेशाय नमः ॥ श्रीकृष्णार्पणमस्तु ॥ श्रीमद्भागवत महापुराण पंचम स्कन्ध • भाग 3 अध्याय 16–17 • भुवनकोश, गंगा महिमा और सङ्कर्षण-स्तुति 52 क्रमाङ्कित मूल पाठ • प्रत्येक का सरल हिंदी भावार्थ पिछले भाग में भरत चरित्र, जड़भरत–रहूगण संवाद और संसारवन रूपक पढ़ा। अब राजा परीक्षित के प्रश्न पर शुकदेवजी जम्बूद्वीप, मेरु और दिव्य प्रदेशों का वर्णन करते हैं। उसके बाद भगवत्पदी गंगा की धाराओं और भगवान शिव की सङ्कर्षण-स्तुति का पाठ आता है। पाठ का संदर्भ: यह पुराण का भुवनकोश और उपासना-संबंधी विश्ववर्णन है। योजन और दिव्यलोक के परिमाण ग्रंथ के अपने संदर्भ में पढ़ें; आधुनिक भूगोल से सीधा मिलान न करें। यहाँ “वर्ष” का अर्थ अनेक स्थानों पर भू-प्रदेश है। इस भाग में पढ़ें अध्याय 16 — जम्बूद्वीप और मेरु का वर्णन • 29 मूल पाठ अध्याय 17 — गंगा की धाराएँ और शिव की सङ्कर्षण-स्तुति • 23 मूल पाठ पंचम स्कन्ध • अध्याय 16 जम्बूद्वीप और मेरु का वर्णन मूल पाठ 16.1 राजोवाच । उक्तस्त्वया भूमण्डलायामविशेषो यावदादित्यस्तपति यत्र चासौ ज्योतिषां गणैश्चन्द्रमा वा सह दृश्यते ॥ १॥ सरल हिंदी भावार्थ: राजा परीक्षित ने कहा—आपने ...

क्या ब्राह्मण शिक्षक ने बाबासाहेब आंबेडकर को अपना उपनाम दिया? विदेश पढ़ाई का खर्च किसने उठाया? पूरा ऐतिहासिक सच

॥ भक्ति भावना • इतिहास, समाज और सत्य का अध्ययन ॥ विशेष ऐतिहासिक शोध लेख डॉ. भीमराव आंबेडकर को आगे बढ़ाने वाले कौन थे? ब्राह्मण शिक्षक, महाराजा सयाजीराव और छिपी हुई ऐतिहासिक सच्चाई क्या एक ब्राह्मण शिक्षक ने बाबासाहेब को अपना उपनाम दिया? विदेश भेजने का खर्च किसने उठाया? मूल जीवनी-साहित्य और आधिकारिक दस्तावेज़ों के आधार पर पूरा सच। प्रस्तुति: भक्ति भावना | इतिहास का सम्मान • किसी जाति का अपमान नहीं आज सोशल मीडिया पर एक प्रश्न बार-बार उठता है— “बाबासाहेब डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर को पढ़ाने, आगे बढ़ाने और विदेश भेजने वाले लोग कौन थे?” कुछ लोग कहते हैं कि एक ब्राह्मण शिक्षक ने उन्हें अपना नाम दिया, ब्राह्मणों ने पढ़ाया और एक हिंदू राजा ने विदेश भेजा। दूसरी ओर, इस पूरी कहानी को अविश्वास के साथ देखने वाले भी हैं। सच्चाई जानने के लिए हमें न किसी बात से मुँह मोड़ना चाहिए और न किसी एक पक्ष की सुविधा के अनुसार इतिहास बदलना चाहिए। इस लेख का उद्देश्य किसी समुदाय के विरुद्ध आरोप लगाना या किसी महान व्यक्तित्व की उपलब्धियाँ किसी एक जाति के नाम कर देना नहीं है। हमारा उद्देश्य ...

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