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श्रीरामचरितमानस बालकाण्ड भाग 39 — विश्वामित्र का अयोध्या आगमन और श्रीराम-लक्ष्मण का प्रस्थान

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श्रीरामचरितमानस बालकाण्ड — भाग 39 विश्वामित्र का अयोध्या आगमन और श्रीराम-लक्ष्मण का प्रस्थान विश्वामित्रजी के साथ यज्ञ-रक्षा के लिए अयोध्या से प्रस्थान करते श्रीराम और लक्ष्मण — बालकाण्ड भाग 39 कथा कहाँ से आगे बढ़ रही है: भाग 38 दोहा 205 पर समाप्त हुआ था। उसके ठीक बाद कथा विश्वामित्रजी के आश्रम से आगे बढ़ती है। मारीच-सुबाहु के यज्ञ-विघ्न से चिंतित विश्वामित्र अयोध्या पहुँचकर श्रीराम और लक्ष्मण को साथ ले जाने का अनुरोध करते हैं। चौपाई यह सब चरित कहा मैं गाई। आगिलि कथा सुनहु मन लाई॥ बिस्वामित्र महामुनि ग्यानी। बसहिं बिपिन सुभ आश्रम जानी॥ सरल अर्थ: बाललीला का वर्णन पूरा करके कथा विश्वामित्रजी के पवित्र वन-आश्रम की ओर बढ़ती है। चौपाई जहँ जप जग्य जोग मुनि करहीं। अति मारीच सुबाहुहि डरहीं॥ देखत जग्य निसाचर धावहिं। करहिं उपद्रव मुनि दुख पावहिं॥ सरल अर्थ: आश्रम में जप, यज्ञ और योग होता था, पर मारीच और सुबाहु यज्ञ में विघ्न डालकर मुनियों को दुःख देते थे। चौपाई गाधितनय मन चिंता ब्यापी। हरि बिनु मरहिं न निसिचर पापी॥ तब मुनिबर मन कीन्ह बिचारा। प्रभु अवतरेउ हरन महि भारा॥ सरल अर्थ: विश्वामित्रजी ...