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धर्मरथ का सारथी: ईश्वर-भजन, वैराग्य और संतोष | रामचरितमानस प्रसंग

धर्मरथ श्रृंखला • भाग 4 धर्मरथ का सारथी: ईश्वर-भजन, वैराग्य और संतोष श्रीरामचरितमानस के धर्मरथ प्रसंग की सरल और प्रेरक व्याख्या जय श्री राम 🙏 श्रीरामचरितमानस के लंकाकाण्ड में भगवान श्रीराम विभीषण को ऐसे धर्मरथ का रहस्य बताते हैं, जिसके प्रत्येक अंग में एक गहरा आध्यात्मिक संदेश छिपा है। पिछले भाग में हमने जाना कि क्षमा, कृपा और समता धर्मरथ की लगाम हैं। अब भगवान श्रीराम बताते हैं कि इस धर्मरथ को सही दिशा में चलाने वाला सारथी कौन है, उसकी रक्षा करने वाली ढाल क्या है और विजय के लिए उसके हाथ में कौन-सी तलवार है। ईस भजनु सारथी सुजाना। बिरति चर्म संतोष कृपाना॥ चौपाई का सरल अर्थ भगवान श्रीराम कहते हैं कि ईश्वर का भजन धर्मरथ का बुद्धिमान सारथी है। वैराग्य इस रथ की ढाल है और संतोष उसकी तलवार है। इसका गहरा संदेश है कि मनुष्य के जीवन को सही दिशा भगवान का स्मरण देता है, संसार के ...