धर्मरथ की लगाम: क्षमा, कृपा और समता | रामचरितमानस प्रसंग
धर्मरथ श्रृंखला • भाग 3 धर्मरथ की लगाम: क्षमा, कृपा और समता श्रीरामचरितमानस के धर्मरथ प्रसंग की सरल और प्रेरक व्याख्या जय श्री राम 🙏 श्रीरामचरितमानस के लंकाकाण्ड में भगवान श्रीराम विभीषण को ऐसे दिव्य धर्मरथ का वर्णन करते हैं, जिसके सहारे मनुष्य संसार के बाहरी संघर्षों के साथ-साथ अपने भीतर के क्रोध, अहंकार, लोभ और द्वेष पर भी विजय प्राप्त कर सकता है। पिछले भाग में हमने जाना कि बल, विवेक, दम और परहित इस धर्मरथ के चार घोड़े हैं। अब भगवान श्रीराम बताते हैं कि इन शक्तिशाली घोड़ों को किस लगाम से नियंत्रित किया जाता है। बल बिबेक दम परहित घोरे। छमा कृपा समता रजु जोरे॥ चौपाई का सरल अर्थ भगवान श्रीराम कहते हैं कि बल, विवेक, इन्द्रिय-संयम और परोपकार धर्मरथ के घोड़े हैं। इन घोड़ों को क्षमा, कृपा और समता रूपी रस्सियों से रथ में जोड़ा गया है। इसका भाव यह है कि मनुष्य के पास शक्ति औ...