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तत्त्वबोध सम्पूर्ण — मूल संस्कृत पाठ और सरल हिंदी भावार्थ सहित

भक्ति भावना • गीता एवं दर्शन तत्त्वबोध सम्पूर्ण मूल पाठ संस्कृत प्रश्न–उत्तर एवं सरल हिंदी भावार्थ ← ग्रंथालय में तत्त्वबोध तत्त्वबोध अद्वैत वेदान्त का आरम्भिक प्रकरण ग्रंथ है, जो परंपरा में आदि शंकराचार्य से संबद्ध माना जाता है। इसमें साधक की योग्यता, आत्मा और शरीर का विवेक, अनुभव की तीन अवस्थाएँ, पाँच कोश, सृष्टिविचार, जीव–ईश्वर का सम्बन्ध और ज्ञान से मुक्ति का विषय समझाया गया है। नीचे मंगलाचरण से उपसंहार तक संस्कृत पाठ के साथ भक्ति भावना के लिए लिखा गया सरल हिंदी भावार्थ दिया गया है। पहले मूल वाक्य पढ़ें, फिर अर्थ पर मनन करें। पाठ-सूचना: यह मुख्यतः गद्य और प्रश्न–उत्तर वाला ग्रंथ है। पढ़ने की सुविधा के लिए विषय-शीर्षक दिए गए हैं; इन्हें मूल अध्याय या श्लोक-संख्या न माना जाए। संस्कृत के स्पष्ट टंकणदोषों में सामान्य वर्तनी-संशोधन किए गए हैं। नीचे का भावार्थ अद्वैत वेदान्त के इसी ग्रंथ के दृष्टिकोण को स्पष्ट करता है। मंगलाचरण और प्रयोजन वासुदेवेन्द्रयोगीन्द्रं नत्वा ज्ञानप्रदं गुरुम् । मुमुक्षूणां हितार्थाय तत्त्वबोधोभिधीयते ॥ साधनचतुष्टयसम्पन्नाधिकारिणां मोक्षसाधनभूतं तत्त्वविवेक...