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श्रीरामचरितमानस बालकाण्ड भाग 69 | अयोध्या में श्रीसीताराम का स्वागत एवं बालकाण्ड सम्पूर्ण | दोहा 344–361 अर्थ सहित

॥ श्री सीताराम ॥   •   भक्ति भावना प्रस्तुत श्रीरामचरितमानस बालकाण्ड — भाग ६९ अयोध्या में चारों नववधुओं का स्वागत, गुरु विदाई एवं बालकाण्ड का समापन दोहा ३४४–३६० • अंतिम सोरठा ३६१ • संपूर्ण मूल पाठ व अर्थ 🌸 बालकाण्ड के समापन प्रसंग में आपका स्वागत है गोस्वामी तुलसीदासजी कृत श्रीरामचरितमानस के इस अंतिम बालकाण्ड भाग में मिथिला से लौटती विवाह-बारात का अयोध्या में स्वागत, चारों नववधुओं का मंगलमय गृहप्रवेश, माताओं का अपार स्नेह, गुरुजनों के आशीर्वाद, श्रीराम की पावन स्मृतियों और महर्षि विश्वामित्रजी की विदाई तक का संपूर्ण क्रम दिया गया है। 📜 अंतिम पाठ-सीमा: पिछले भाग के दोहा ३४३ के बाद की चौपाइयों से सोरठा ३६१ तक। इसमें ७३ चौपाई-इकाइयाँ, १८ दोहा-पाठ, १ समापन छंद तथा अंतिम सोरठा ३६१ हैं। दोहा ३५० के दोनों खंड (क और ख) अलग शामिल हैं। अयोध्या का स्वागत (344–348) महल में मंगल (349–354) राम का विश्राम (355–358) अंतिम समापन (359–361) ॥ प्रसंग 01 / १८ ॥ अयोध्या का भव्य मंगल-सज्जा उत्सव ✦ चौपाई 1 ✦ हने निसान पनव बर बाजे। भेरि संख धुनि हय गय गाजे॥ झाँझि बिरव डिंड...