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गोस्वामी नरहरिदास का जीवन परिचय — तुलसीदास के गुरु, रामकथा और परंपरा का विवेचन

॥ श्री सीताराम ॥ · भक्ति भावना प्रस्तुत गोस्वामी नरहरिदास का जीवन परिचय — तुलसीदास के गुरु, रामकथा और परंपरा का विवेचन गुरु-स्मरण · सूकरखेत का प्रसंग · उपलब्ध साक्ष्य · मान्यता और इतिहास का अंतर नरहरिदास जी का परिचय कैसे समझें? गोस्वामी नरहरिदास जी का नाम रामभक्ति की उस परंपरा में आदर से लिया जाता है जो उन्हें गोस्वामी तुलसीदास का गुरु मानती है। लोकप्रिय जीवन-कथाओं में वे बालक तुलसी को संरक्षण, शिक्षा और रामकथा की दिशा देने वाले संत के रूप में आते हैं। लेकिन उनके जीवन की सभी घटनाओं, जन्म-वर्ष और स्थान के बारे में एक समान निर्विवाद ऐतिहासिक विवरण उपलब्ध नहीं है। इसलिए श्रद्धापूर्वक परिचय देते समय प्रमाण की सीमा स्पष्ट रखना आवश्यक है। इस लेख में तीन बातों को अलग रखा गया है—तुलसीदास के अपने काव्य में गुरु-स्मरण, बाद की जीवनी-परंपरा और आधुनिक शोध में दिखाई देने वाले मतभेद। किसी लोकप्रिय कथा का सम्मान करना और उसके हर विवरण को समकालीन इतिहास मान लेना अलग बातें हैं। गुरु का महत्त्व समझाने के लिए अनिश्चित तारीखों या चमत्कारों को निश्चित रूप में जोड़ने की आवश्यकता नहीं है। 1. रामचरितमानस की गुर...

श्रीरामचरितमानस अयोध्याकाण्ड भाग 5 | पादुका-प्रदान, भरत का नंदिग्राम-व्रत और अयोध्याकाण्ड सम्पूर्ण | दोहा 241–326 अर्थ सहित

॥ श्री सीताराम ॥ · भक्ति भावना प्रस्तुत श्रीरामचरितमानस अयोध्याकाण्ड — भाग ५ जनकजी का परामर्श, पादुका-प्रदान और नंदिग्राम में भरतजी का व्रत दोहा २४१–३२६ · अंतिम भाग · बीच की सभी चौपाइयाँ एवं चार छंद · मूल पाठ और सरल हिंदी अर्थ ← पिछला भाग ४ · दोहा १५१–२४० ग्रंथालय · सभी प्रकाशित संग्रह बालकाण्ड सम्पूर्ण · ६९ भाग भरत-चरित्र से अयोध्याकाण्ड के समापन तक यह अंतिम भाग दोहा २४० के राम–भरत मिलन के ठीक बाद की चौपाइयों से शुरू होता है। यहाँ दोनों राजसमाजों का चित्रकूट में मिलना, जनकजी का परामर्श, भरतजी की निष्काम सेवा-विनती, राम का राजधर्म-उपदेश, पादुका-प्रदान, भरतकूप, अयोध्या-वापसी और नंदिग्राम का व्रत क्रम से पढ़ें। अंतिम सोरठा ३२६ के बाद मूल समापन-वचन भी दिया है। भागों की संख्या कम रखने के लिए ८६ क्रमांक एक साथ रखे हैं। हर क्रमांक के पहले की पूरी चौपाइयाँ और उनका समेकित सरल हिंदी अर्थ है। छंद और दोहा/सोरठा का अर्थ अलग दिया है। यह मूल पाठ की स्वतंत्र अध्ययन-सहायक व्याख्या है, शब्दशः टीका नहीं। खोलकर अपना दोहा चुनें इच्छित समूह खोलें; पूरा मूल पाठ और अर्थ इसी लेख में हैं। क्रमांक २४१–२५० द...