श्रीरामचरितमानस बालकाण्ड भाग 27 — रामावतार के कारण, जय-विजय, जलंधर और नारद-श्राप की भूमिका
श्रीरामचरितमानस बालकाण्ड — भाग 27 रामावतार के कारण • जय-विजय • जलंधर प्रसंग • नारद-श्राप की भूमिका भाग 26 सोरठा 120 (घ) पर समाप्त हुआ था। अब शिवजी रामावतार के अनेक कारण बताते हैं—धर्म की रक्षा, जय-विजय का शाप, रावण-कुंभकर्ण का जन्म, जलंधर प्रसंग और अंत में नारदजी के शाप की कथा की भूमिका आती है। चौपाई सुनु गिरिजा हरिचरित सुहाए। बिपुल बिसद निगमागम गाए॥ हरि अवतार हेतु जेहि होई। इदमित्थं कहि जाइ न सोई॥ सरल अर्थ: शिवजी कहते हैं कि हरि के अवतार के कारण अनेक और गहरे हैं; किसी एक कारण को ही अंतिम कारण नहीं कहा जा सकता। चौपाई राम अतर्क्य बुद्धि मन बानी। मत हमार अस सुनहि सयानी॥ तदपि संत मुनि बेद पुराना। जस कछु कहहिं स्वमति अनुमाना॥ सरल अर्थ: श्रीराम बुद्धि, मन और वाणी की सीमा से परे हैं। फिर भी संत, मुनि, वेद और पुराण अपनी समझ के अनुसार उनके अवतार के कारण बताते हैं। चौपाई तस मैं सुमुखि सुनावउँ तोही। समुझि परइ जस कारन मोही॥ जब जब होइ धरम कै हानी। बाढ़हिं असुर अधम अभिमानी॥ सरल अर्थ: शिवजी उमा से कहते हैं कि वे अपनी समझ के अनुसार कारण बताएँगे। जब धर्म की हानि और अधर्मियों का अभिमान बढ़ता है, त...