श्री गौरी स्तुति का पूरा प्रसंग | माता सीता का गौरी पूजन, मूल पाठ एवं हिंदी अर्थ
❀ श्री सीताराम ❀ भक्ति भावना प्रस्तुत श्रीरामचरितमानस · बालकाण्ड · दोहा २३४–२३६ श्री गौरी स्तुति का पूरा प्रसंग माता सीता का गौरी पूजन, मूल चौपाइयाँ, दोहा, छन्द, सोरठा और सरल हिंदी भावार्थ सहित — पुष्पवाटिका से माँ भवानी के दिव्य आशीर्वाद तक की भावपूर्ण कथा। मूल पाठ क्रमवार सरल अर्थ १६ चित्रों की श्रृंखला मोबाइल पर आसान पाठ चित्र 01: कवर: श्री गौरी स्तुति का पूरा प्रसंग | भक्ति भावना श्रीरामचरितमानस के बालकाण्ड में वर्णित माता सीता का गौरी पूजन भक्तिपरंपरा का अत्यंत मधुर प्रसंग है। मिथिला की पुष्पवाटिका में श्रीराम के दर्शन के बाद जानकीजी माता पार्वती के मंदिर में प्रार्थना करती हैं। वे देवी को विश्वजननी और अंतर्यामी मानकर अपना मन उनके चरणों में अर्पित करती हैं। माता गौरी उनकी विनय से प्रसन्न होकर मनचाहा वर प्राप्त होने का मंगलमय आशीर्वाद देती हैं। यहाँ श्री गौरी स्तुति का मूल पाठ और पूरा संबंधित प्रसंग ठीक उसी क्रम में दिया गया है जिसमें वह बालकाण्ड में आता है। प्रत्येक चौपाई/छन्द के साथ सरल हिंदी अर्थ, प्रसंग की व्याख्या और भक्ति भावना की १६ चित्रों वाली श्रृंखला साथ दी...
