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हनुमान बाहुक सम्पूर्ण — सभी 44 छंद और सरल हिंदी अर्थ | तुलसीदास

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गोस्वामी तुलसीदास · आर्त विनय और शरणागति हनुमान बाहुक सम्पूर्ण सभी 44 छंद · मूल पाठ और प्रत्येक का सरल हिंदी अर्थ एक ही लेख में 44 मूल छंद 44 सरल अर्थ हनुमान बाहुक गोस्वामी तुलसीदास जी की हनुमान-स्तुति है। आरंभ में हनुमान जी के तेज, पराक्रम, सेवा और करुणा का वर्णन है। आगे कवि बाहु-पीड़ा और शारीरिक कष्ट के बीच अपने आराध्य को पुकारते हैं। इस रचना में स्तुति के साथ आत्मीय उलाहना, अपने आचरण का विचार, रामनाम का भरोसा और अंततः शरणागति का गहरा स्वर मिलता है। पढ़ने की व्यवस्था: सभी 44 छंद मूल क्रम में हैं। छप्पय, झूलना, घनाक्षरी और सवैया के संकेत साथ रखे गए हैं। हर छंद के नीचे स्वतंत्र सरल हिंदी अर्थ है। चार विषय-खंड केवल पढ़ने की सुविधा के लिए हैं। यह भक्ति-साहित्य की प्रस्तुति है; पाठ से रोग ठीक होने की गारंटी नहीं दी गई है। श्रीगणेशाय नमः श्रीजानकीवल्लभो विजयते विषय-सूची स्वरूप, पराक्रम और हनुमान-महिमा · छंद 1–14 आश्रय, आत्मीय उलाहना और विनय · छंद 15–19 बाहु-पीड़ा में आर्त प्रार्थना · छंद 20–35 रामनाम, आत्मपरीक्षण और शरणागति · छंद 36–44 रचना-प्रसंग, पाठ-सुझाव और वीडियो सीधे छंद पर ...