भगवान शिव के 108 नाम अर्थ सहित | शिव नामावली और पाठ विधि
भगवान शिव के 108 नाम अर्थ सहित
शिव अष्टोत्तरशतनामावली • नमस्कार-मंत्र • सरल हिंदी अर्थ • पाठ विधि
महादेव का प्रत्येक नाम उनके किसी गुण, स्वरूप या पौराणिक प्रसंग का स्मरण कराता है। शम्भु में सुख का भाव है, गङ्गाधर में गंगा को धारण करने की कथा और पशुपति में सभी जीवों के प्रति अपनापन। नामों को अर्थ सहित पढ़ने से प्रार्थना के साथ चिंतन भी जुड़ता है।
यहाँ भगवान शिव की प्रचलित अष्टोत्तरशतनामावली के 108 नाम दिए गए हैं। “अष्टोत्तरशत” का अर्थ है सौ से आठ अधिक, अर्थात 108। प्रत्येक नाम के नीचे पाठ के लिए नमस्कार-मंत्र और समझने के लिए सरल भावार्थ है।
शिव के 108 नाम: संपूर्ण नामावली
पाठ करते समय प्रत्येक कार्ड की “ॐ … नमः” वाली पंक्ति पढ़ें। अर्थ समझने के लिए रुककर पढ़ना भी उचित है।
नाम 1–27
- 1. शिव
ॐ शिवाय नमः।
अर्थ: कल्याणस्वरूप।
- 2. महेश्वर
ॐ महेश्वराय नमः।
अर्थ: महान ईश्वर।
- 3. शम्भु
ॐ शम्भवे नमः।
अर्थ: सुख और मंगल के स्रोत।
- 4. पिनाकी
ॐ पिनाकिने नमः।
अर्थ: पिनाक धनुष के धारक।
- 5. शशिशेखर
ॐ शशिशेखराय नमः।
अर्थ: मस्तक पर चंद्रमा सजाने वाले।
- 6. वामदेव
ॐ वामदेवाय नमः।
अर्थ: सुंदर और कल्याणमय देव।
- 7. विरूपाक्ष
ॐ विरूपाक्षाय नमः।
अर्थ: विलक्षण नेत्रों वाले त्रिनेत्रधारी।
- 8. कपर्दी
ॐ कपर्दिने नमः।
अर्थ: जटाजूट वाले।
- 9. नीललोहित
ॐ नीललोहिताय नमः।
अर्थ: नीले और लाल वर्ण से युक्त।
- 10. शङ्कर
ॐ शङ्कराय नमः।
अर्थ: कल्याण करने वाले।
- 11. शूलपाणि
ॐ शूलपाणये नमः।
अर्थ: हाथ में त्रिशूल रखने वाले।
- 12. खट्वाङ्गी
ॐ खट्वाङ्गिने नमः।
अर्थ: खट्वांग आयुध के धारक।
- 13. विष्णुवल्लभ
ॐ विष्णुवल्लभाय नमः।
अर्थ: विष्णु के प्रिय।
- 14. शिपिविष्ट
ॐ शिपिविष्टाय नमः।
अर्थ: प्रकाश-किरणों में व्याप्त दिव्य सत्ता।
- 15. अम्बिकानाथ
ॐ अम्बिकानाथाय नमः।
अर्थ: अंबिका के स्वामी।
- 16. श्रीकण्ठ
ॐ श्रीकण्ठाय नमः।
अर्थ: शोभायुक्त कंठ वाले।
- 17. भक्तवत्सल
ॐ भक्तवत्सलाय नमः।
अर्थ: भक्तों पर स्नेह रखने वाले।
- 18. भव
ॐ भवाय नमः।
अर्थ: जगत के उद्भव का आधार।
- 19. शर्व
ॐ शर्वाय नमः।
अर्थ: संहारकारी रुद्र स्वरूप।
- 20. त्रिलोकेश
ॐ त्रिलोकेशाय नमः।
अर्थ: तीनों लोकों के अधिपति।
- 21. शितिकण्ठ
ॐ शितिकण्ठाय नमः।
अर्थ: विशिष्ट वर्ण वाले कंठ के धारक।
- 22. शिवाप्रिय
ॐ शिवाप्रियाय नमः।
अर्थ: शिवा अर्थात पार्वती के प्रिय।
- 23. उग्र
ॐ उग्राय नमः।
अर्थ: प्रचंड शक्ति वाले।
- 24. कपाली
ॐ कपालिने नमः।
अर्थ: कपाल धारण करने वाले।
- 25. कामारि
ॐ कामारये नमः।
अर्थ: कामदेव का दहन करने वाले।
- 26. अन्धकासुरसूदन
ॐ अन्धकासुरसूदनाय नमः।
अर्थ: अंधक असुर का संहार करने वाले।
- 27. गङ्गाधर
ॐ गङ्गाधराय नमः।
अर्थ: गंगा को धारण करने वाले।
नाम 28–54
- 28. ललाटाक्ष
ॐ ललाटाक्षाय नमः।
अर्थ: ललाट पर नेत्र वाले।
- 29. कालकाल
ॐ कालकालाय नमः।
अर्थ: काल के भी नियंत्रक।
- 30. कृपानिधि
ॐ कृपानिधये नमः।
अर्थ: करुणा के भंडार।
- 31. भीम
ॐ भीमाय नमः।
अर्थ: प्रचंड और भयप्रद स्वरूप वाले।
- 32. परशुहस्त
ॐ परशुहस्ताय नमः।
अर्थ: हाथ में परशु रखने वाले।
- 33. मृगपाणि
ॐ मृगपाणये नमः।
अर्थ: हाथ में मृग धारण करने वाले।
- 34. जटाधर
ॐ जटाधराय नमः।
अर्थ: जटाओं के धारक।
- 35. कैलासवासी
ॐ कैलासवासिने नमः।
अर्थ: कैलास में वास करने वाले।
- 36. कवची
ॐ कवचिने नमः।
अर्थ: कवच से युक्त।
- 37. कठोर
ॐ कठोराय नमः।
अर्थ: दृढ़ और अडिग।
- 38. त्रिपुरान्तक
ॐ त्रिपुरान्तकाय नमः।
अर्थ: त्रिपुर का अंत करने वाले।
- 39. वृषाङ्क
ॐ वृषाङ्काय नमः।
अर्थ: वृषभ के चिह्न वाले।
- 40. वृषभारूढ
ॐ वृषभारूढाय नमः।
अर्थ: वृषभ पर आरूढ़।
- 41. भस्मोद्धूलितविग्रह
ॐ भस्मोद्धूलितविग्रहाय नमः।
अर्थ: भस्म से विभूषित शरीर वाले।
- 42. सामप्रिय
ॐ सामप्रियाय नमः।
अर्थ: सामगान के प्रेमी।
- 43. स्वरमय
ॐ स्वरमयाय नमः।
अर्थ: स्वरों में अभिव्यक्त।
- 44. त्रयीमूर्ति
ॐ त्रयीमूर्तये नमः।
अर्थ: वेदत्रयी के मूर्त स्वरूप।
- 45. अनीश्वर
ॐ अनीश्वराय नमः।
अर्थ: जिनके ऊपर अन्य कोई ईश्वर नहीं।
- 46. सर्वज्ञ
ॐ सर्वज्ञाय नमः।
अर्थ: सब कुछ जानने वाले।
- 47. परमात्मा
ॐ परमात्मने नमः।
अर्थ: सभी जीवों के परम आत्मस्वरूप।
- 48. सोमसूर्याग्निलोचन
ॐ सोमसूर्याग्निलोचनाय नमः।
अर्थ: चंद्र, सूर्य और अग्नि रूपी नेत्र वाले।
- 49. हविस्
ॐ हविषे नमः।
अर्थ: यज्ञ की आहुति के स्वरूप।
- 50. यज्ञमय
ॐ यज्ञमयाय नमः।
अर्थ: यज्ञस्वरूप।
- 51. सोम
ॐ सोमाय नमः।
अर्थ: सोम की शीतलता और सौम्यता वाले।
- 52. पञ्चवक्त्र
ॐ पञ्चवक्त्राय नमः।
अर्थ: पाँच मुखों वाले।
- 53. सदाशिव
ॐ सदाशिवाय नमः।
अर्थ: सदा कल्याणस्वरूप।
- 54. विश्वेश्वर
ॐ विश्वेश्वराय नमः।
अर्थ: विश्व के ईश्वर।
नाम 55–81
- 55. वीरभद्र
ॐ वीरभद्राय नमः।
अर्थ: पराक्रमी और मंगलकारी रुद्ररूप।
- 56. गणनाथ
ॐ गणनाथाय नमः।
अर्थ: गणों के नाथ।
- 57. प्रजापति
ॐ प्रजापतये नमः।
अर्थ: प्रजा के स्वामी।
- 58. हिरण्यरेता
ॐ हिरण्यरेतसे नमः।
अर्थ: स्वर्णिम सृजन-बीज वाले।
- 59. दुर्धर्ष
ॐ दुर्धर्षाय नमः।
अर्थ: जिन्हें परास्त करना कठिन है।
- 60. गिरीश
ॐ गिरीशाय नमः।
अर्थ: पर्वत के ईश्वर।
- 61. गिरिश
ॐ गिरिशाय नमः।
अर्थ: पर्वत पर निवास करने वाले।
- 62. अनघ
ॐ अनघाय नमः।
अर्थ: पाप और दोष से रहित।
- 63. भुजङ्गभूषण
ॐ भुजङ्गभूषणाय नमः।
अर्थ: सर्पों से विभूषित।
- 64. भर्ग
ॐ भर्गाय नमः।
अर्थ: पावन करने वाला दिव्य तेज।
- 65. गिरिधन्वा
ॐ गिरिधन्विने नमः।
अर्थ: पर्वत को धनुष बनाने वाले।
- 66. गिरिप्रिय
ॐ गिरिप्रियाय नमः।
अर्थ: पर्वतों से प्रेम रखने वाले।
- 67. कृत्तिवासा
ॐ कृत्तिवाससे नमः।
अर्थ: चर्म का वस्त्र पहनने वाले।
- 68. पुराराति
ॐ पुरारातये नमः।
अर्थ: त्रिपुर के शत्रु।
- 69. भगवान्
ॐ भगवते नमः।
अर्थ: दिव्य ऐश्वर्य से संपन्न।
- 70. प्रमथाधिप
ॐ प्रमथाधिपाय नमः।
अर्थ: प्रमथ गणों के अधिपति।
- 71. मृत्युञ्जय
ॐ मृत्युञ्जयाय नमः।
अर्थ: मृत्यु को जीतने वाले।
- 72. सूक्ष्मतनु
ॐ सूक्ष्मतनवे नमः।
अर्थ: सूक्ष्म स्वरूप वाले।
- 73. जगद्व्यापी
ॐ जगद्व्यापिने नमः।
अर्थ: समस्त जगत में व्याप्त।
- 74. जगद्गुरु
ॐ जगद्गुरवे नमः।
अर्थ: जगत को ज्ञान देने वाले गुरु।
- 75. व्योमकेश
ॐ व्योमकेशाय नमः।
अर्थ: आकाश के समान विस्तृत केश वाले।
- 76. महासेनजनक
ॐ महासेनजनकाय नमः।
अर्थ: महासेन अर्थात कार्तिकेय के पिता।
- 77. चारुविक्रम
ॐ चारुविक्रमाय नमः।
अर्थ: सुंदर और गौरवमय पराक्रम वाले।
- 78. रुद्र
ॐ रुद्राय नमः।
अर्थ: प्रचंड रुद्र स्वरूप।
- 79. भूतपति
ॐ भूतपतये नमः।
अर्थ: समस्त प्राणियों के स्वामी।
- 80. स्थाणु
ॐ स्थाणवे नमः।
अर्थ: अचल और स्थिर।
- 81. अहिर्बुध्न्य
ॐ अहिर्बुध्न्याय नमः।
अर्थ: गहराई में स्थित सर्परूप से संबद्ध रुद्रनाम।
नाम 82–108
- 82. दिगम्बर
ॐ दिगम्बराय नमः।
अर्थ: दिशाएँ ही जिनका वस्त्र हैं।
- 83. अष्टमूर्ति
ॐ अष्टमूर्तये नमः।
अर्थ: आठ रूपों में प्रकट।
- 84. अनेकात्मा
ॐ अनेकात्मने नमः।
अर्थ: अनेक रूपों में विद्यमान।
- 85. सात्त्विक
ॐ सात्त्विकाय नमः।
अर्थ: सत्त्व और निर्मलता से युक्त।
- 86. शुद्धविग्रह
ॐ शुद्धविग्रहाय नमः।
अर्थ: निर्मल स्वरूप वाले।
- 87. शाश्वत
ॐ शाश्वताय नमः।
अर्थ: सदैव रहने वाले।
- 88. खण्डपरशु
ॐ खण्डपरशवे नमः।
अर्थ: खंडित परशु वाले।
- 89. अज
ॐ अजाय नमः।
अर्थ: जन्म से परे।
- 90. पाशविमोचक
ॐ पाशविमोचकाय नमः।
अर्थ: बंधन खोलने वाले।
- 91. मृड
ॐ मृडाय नमः।
अर्थ: सुख देने वाले करुणामय शिव।
- 92. पशुपति
ॐ पशुपतये नमः।
अर्थ: जीवों के स्वामी।
- 93. देव
ॐ देवाय नमः।
अर्थ: प्रकाशमय आराध्य।
- 94. महादेव
ॐ महादेवाय नमः।
अर्थ: महान देव।
- 95. अव्यय
ॐ अव्ययाय नमः।
अर्थ: जिनका क्षय नहीं होता।
- 96. हरि
ॐ हरये नमः।
अर्थ: दुःख और बंधन हरने वाले।
- 97. पूषदन्तभिद्
ॐ पूषदन्तभिदे नमः।
अर्थ: पूषा के दाँत भंग करने वाले रुद्ररूप।
- 98. अव्यग्र
ॐ अव्यग्राय नमः।
अर्थ: व्याकुलता से मुक्त।
- 99. दक्षाध्वरहर
ॐ दक्षाध्वरहराय नमः।
अर्थ: दक्ष का यज्ञ नष्ट करने वाले।
- 100. हर
ॐ हराय नमः।
अर्थ: हरण करने वाले शिव।
- 101. भगनेत्रभिद्
ॐ भगनेत्रभिदे नमः।
अर्थ: भग देवता के नेत्र भंग करने वाले रुद्ररूप।
- 102. अव्यक्त
ॐ अव्यक्ताय नमः।
अर्थ: प्रकट रूप की सीमा से परे।
- 103. सहस्राक्ष
ॐ सहस्राक्षाय नमः।
अर्थ: हजारों नेत्रों वाले विराट स्वरूप।
- 104. सहस्रपाद्
ॐ सहस्रपदे नमः।
अर्थ: हजारों चरणों वाले विराट स्वरूप।
- 105. अपवर्गप्रद
ॐ अपवर्गप्रदाय नमः।
अर्थ: मुक्ति प्रदान करने वाले।
- 106. अनन्त
ॐ अनन्ताय नमः।
अर्थ: जिनका अंत नहीं।
- 107. तारक
ॐ तारकाय नमः।
अर्थ: संसार-सागर से पार लगाने वाले।
- 108. परमेश्वर
ॐ परमेश्वराय नमः।
अर्थ: परम ईश्वर।
कुछ नामों को ठीक से समझें
अनीश्वर का अर्थ ईश्वर का अभाव नहीं
इस नामावली में “अनीश्वर” का भाव ऐसे परम स्वामी से है जिनके ऊपर कोई अन्य नियंता नहीं है। इसे यहाँ नास्तिकता के अर्थ में नहीं पढ़ना चाहिए।
गिरीश और गिरिश दो पाठ-रूप हैं
इस सूची में दोनों नाम आते हैं। “गिरीश” पर्वत के ईश्वर का और “गिरिश” पर्वत पर रहने वाले शिव का स्मरण कराता है। इनकी मात्राओं का अंतर ध्यान में रखें।
पौराणिक नामों का संदर्भ
पूषदन्तभिद्, भगनेत्रभिद् और दक्षाध्वरहर जैसे नाम दक्ष-यज्ञ के प्रसंग से जुड़े हैं। इन्हें उसी कथात्मक संदर्भ में समझें। उस प्रसंग का विस्तार हमारी वीरभद्र और दक्ष-यज्ञ की कथा में पढ़ सकते हैं।
पशुपति और पाशविमोचक
ये नाम जीव और बंधन से मुक्ति का स्मरण कराते हैं। भक्ति का व्यावहारिक भाव है कि हम जीवों के प्रति दया रखें और अपने अहंकार तथा आसक्ति को पहचानें। विस्तार से पढ़ें: भगवान पशुपतिनाथ कौन हैं?
शिव नामावली के पाठ की सरल विधि
यह घर पर किए जाने वाले सामान्य नाम-स्मरण की सरल रूपरेखा है। विशेष अनुष्ठान या कुलपरंपरा की विधि अलग हो सकती है।
- शांत स्थान चुनेंस्वच्छ स्थान पर सहज आसन में बैठें। शिव का चित्र अथवा शिवलिंग हो तो उसके सामने बैठ सकते हैं।
- मन में प्रार्थना करेंमहादेव से विवेक, करुणा और संयम का भाव माँगें। कुछ क्षण शांत होकर ध्यान केंद्रित करें।
- क्रम से नाम पढ़ेंऊपर दिए 108 नमस्कार-मंत्र धीरे-धीरे पढ़ें। उच्चारण में जल्दबाजी न करें।
- इच्छानुसार अर्पण करेंअपनी परंपरा के अनुसार जल, पुष्प या बिल्वपत्र अर्पित कर सकते हैं। केवल नाम-स्मरण के लिए 108 अलग-अलग वस्तुओं का प्रबंध अनिवार्य नहीं है।
- प्रार्थना से समाप्त करेंसभी के कल्याण की भावना रखें। चाहें तो कुछ समय मौन बैठकर किसी एक नाम के अर्थ पर मनन करें।
शिव के नामों से दैनिक जीवन की सीख
“कृपानिधि” पढ़ते समय किसी जरूरतमंद की सहायता का संकल्प लें। “अव्यग्र” का स्मरण करते समय प्रतिक्रिया देने से पहले ठहरें। “भक्तवत्सल” से अपनापन और “पाशविमोचक” से अपनी हानिकारक आदतों को पहचानने की प्रेरणा लें। ये नामों पर आधारित चिंतन के सुझाव हैं।
भक्त नाम-जप को श्रद्धा, एकाग्रता और आत्मचिंतन का साधन मानते हैं। इसे निश्चित समय में धन, स्वास्थ्य या किसी इच्छित परिणाम की गारंटी की तरह नहीं समझना चाहिए।
सामान्य प्रश्न
क्या शिव के 108 नाम रोज पढ़ सकते हैं?
सामान्य नाम-स्मरण रोज किया जा सकता है। अपनी सुविधा के अनुसार शांत समय चुनें और अर्थ के साथ पढ़ने का अभ्यास करें।
क्या प्रत्येक नाम के आगे ॐ और अंत में नमः कहना है?
यहाँ पाठ के लिए पूरा नमस्कार-मंत्र दिया गया है। उसी पंक्ति को पढ़ें; आपको अलग से शब्द जोड़ने की आवश्यकता नहीं है।
क्या 108 नाम और एक मंत्र की 108 आवृत्तियाँ एक ही बात हैं?
नहीं। नामावली में शिव के 108 नाम पढ़े जाते हैं। मंत्र-जप में एक ही मंत्र को चुनी गई संख्या में दोहराया जाता है।
क्या पाठ के लिए सोमवार तक प्रतीक्षा करनी चाहिए?
शिव का सामान्य नाम-स्मरण किसी भी दिन किया जा सकता है। सोमवार या किसी पर्व पर पाठ करना व्यक्तिगत श्रद्धा और परंपरा का विषय है।
क्या अलग पुस्तकों में नामों का क्रम अलग हो सकता है?
हाँ, पाठांतर मिलते हैं। अपने नियमित पाठ में किसी एक विश्वसनीय नामावली का क्रम बनाए रखें।
शिव भक्ति के अन्य लेख
पाठ-संदर्भ: पारंपरिक नामावली का क्रम दृक पंचांग की शिव अष्टोत्तरशतनामावली से मिलाया गया है। सरल हिंदी भावार्थ और व्याख्या इस लेख के लिए लिखे गए हैं।
हर हर महादेव!
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