कंदरिया महादेव मंदिर, खजुराहो — चंदेलकालीन नागर वास्तुकला, कैलासाकार शिखर और अद्भुत शिल्पकला

🔱 भारत के प्राचीन मंदिर • भाग 19

कंदरिया महादेव मंदिर, खजुराहो

11वीं शताब्दी का महान चंदेलकालीन शिव मंदिर — जहाँ ऊँचा नागर शिखर, उसके चारों ओर उठते अनेक उरुशृंग, प्रदक्षिणापथ, सजीव देव-मूर्तियाँ, सुरसुंदरियाँ, नर्तक-संगीतकार और धार्मिक तथा सांसारिक जीवन के असंख्य दृश्य उत्तर भारतीय मंदिर वास्तुकला को अपने परिपक्व शिखर पर पहुँचाते हैं।

🔱 यदि तंजावुर और दारासुरम ने हमें दक्षिण भारत की द्रविड़ मंदिर परंपरा दिखाई, तो कंदरिया महादेव हमें उत्तर भारत की परिपक्व नागर वास्तुकला का एक महान रूप दिखाता है।

मध्य प्रदेश के खजुराहो में स्थित कंदरिया महादेव मंदिर भगवान शिव को समर्पित चंदेलकालीन मंदिर है।

इसका निर्माण 11वीं शताब्दी के प्रारंभिक-मध्य भाग से जुड़ा है। सरकारी स्रोतों में निर्माता के नाम को लेकर कुछ अंतर मिलता है, लेकिन मंदिर को सामान्यतः चंदेल राजा विद्याधर के काल से जोड़ा जाता है।

UNESCO कंदरिया के मूर्तिकला कार्यक्रम को भारतीय कला की महान उपलब्धियों में विशेष स्थान देता है।
मंदिर:
कंदरिया महादेव
स्थान:
खजुराहो, छतरपुर, मध्य प्रदेश
काल:
11वीं शताब्दी
राजवंश:
चंदेल
आराध्य:
भगवान शिव
वास्तु शैली:
परिपक्व नागर शैली
विशेषता:
ऊँचा शिखर और अनेक उरुशृंग
स्थिति:
UNESCO World Heritage Group का हिस्सा

📍 कंदरिया महादेव कहाँ स्थित है?

कंदरिया महादेव खजुराहो के Western Group of Temples में स्थित है।

खजुराहो मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित ऐतिहासिक मंदिर-नगर है।

यहाँ के मंदिर पश्चिमी, पूर्वी और दक्षिणी समूहों में विभाजित हैं।

इनमें कंदरिया महादेव पश्चिमी समूह का सबसे प्रभावशाली शिव मंदिर माना जाता है।

🏛️ कंदरिया महादेव क्यों विशेष है?

खजुराहो के सबसे विशाल मंदिरों में एक

11वीं शताब्दी का चंदेलकालीन शिव मंदिर

परिपक्व उत्तर भारतीय नागर वास्तुकला

ऊँचा मुख्य शिखर

उसके चारों ओर अनेक उरुशृंग

आंतरिक प्रदक्षिणापथ

अत्यंत घनी मूर्तिकला

UNESCO World Heritage Site का हिस्सा

⏳ मंदिर कितना पुराना है?

UNESCO खजुराहो के मुख्य मंदिर निर्माण काल को लगभग 950 से 1050 ईस्वी के बीच रखता है।

Madhya Pradesh Tourism कंदरिया महादेव को लगभग 1025–1050 ईस्वी के बीच निर्मित बताता है।

इस आधार पर यह 11वीं शताब्दी के परिपक्व चंदेलकालीन मंदिरों में गिना जाता है।

📌 निर्माता के नाम पर थोड़ी सावधानी जरूरी है

कुछ भारत सरकार के tourism विवरण मंदिर को चंदेल राजा विद्याधर से जोड़ते हैं। एक अन्य सरकारी tourism page धनदेव का नाम देता है। इसलिए सबसे सुरक्षित ऐतिहासिक भाषा है — “11वीं शताब्दी का चंदेलकालीन मंदिर, सामान्यतः विद्याधर के शासनकाल से संबद्ध।”

👑 चंदेल और खजुराहो

चंदेल राजवंश 10वीं और 11वीं शताब्दी में मध्य भारत की महत्वपूर्ण राजनीतिक और सांस्कृतिक शक्ति था।

UNESCO के अनुसार चंदेल कला और मंदिर वास्तुकला का उत्कर्ष लगभग 950–1050 ईस्वी के बीच दिखाई देता है।

खजुराहो के हिंदू और जैन मंदिर इसी काल की सबसे महान बची हुई वास्तु विरासत हैं।

🔱 भगवान शिव को समर्पित मंदिर

कंदरिया महादेव भगवान शिव को समर्पित है।

मुख्य गर्भगृह में शिवलिंग मंदिर का धार्मिक केंद्र है।

बाहर की अत्यंत जटिल मूर्ति-संपदा के विपरीत गर्भगृह अपेक्षाकृत शांत, गंभीर और अंधकारमय आध्यात्मिक केंद्र बनता है।

🏔️ मंदिर पहाड़ जैसा क्यों दिखाई देता है?

कंदरिया की सबसे महत्वपूर्ण वास्तु विशेषता है उसका ऊँचा मुख्य शिखर

इसके चारों ओर छोटे-छोटे उरुशृंग क्रमशः ऊपर उठते हैं।

दूर से पूरा मंदिर एक अकेली इमारत के बजाय एक पर्वत-श्रेणी जैसा दिखाई देता है।

यह भगवान शिव के पौराणिक निवास कैलास पर्वत की स्थापत्य स्मृति से जोड़ा जाता है।

🏔️ शिखर की दृश्य रचना

छोटे उरुशृंग

बड़े होते सहायक शिखर

मुख्य ऊँचा शिखर

पर्वत जैसी ऊर्ध्व गति

📏 मंदिर कितना ऊँचा है?

पुराने ASI वास्तु अध्ययन कंदरिया की ऊँचाई लगभग 116½ फीट बताते हैं।

आधुनिक सरकारी tourism pages इसे लगभग 31 से 36 मीटर के दायरे में वर्णित करते हैं।

यह अंतर मापने के अलग reference points के कारण हो सकता है।

इसलिए इसे लगभग 35 मीटर ऊँचा कहना एक सुरक्षित सामान्य विवरण है।

🏛️ मंदिर की योजना

पुराने ASI architectural study के अनुसार कंदरिया की योजना विकसित उत्तर भारतीय मंदिर परंपरा का पूर्ण रूप दिखाती है।

  • अर्धमंडप: प्रवेश का प्रारंभिक porch।
  • मंडप: प्रारंभिक सभा-कक्ष।
  • महामंडप: अधिक विकसित केंद्रीय hall।
  • अंतराल: मंडप और गर्भगृह के बीच का भाग।
  • गर्भगृह: शिवलिंग का पवित्र केंद्र।
  • प्रदक्षिणापथ: गर्भगृह के चारों ओर परिक्रमा मार्ग।

🚶 गर्भगृह के चारों ओर प्रदक्षिणापथ

कंदरिया संधार योजना का मंदिर है।

अर्थात गर्भगृह के चारों ओर आंतरिक परिक्रमा मार्ग बनाया गया है।

पुराने ASI अध्ययन इस passage को मंदिर की विशिष्ट योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हैं।

इससे पूजा-विधि और architecture सीधे एक-दूसरे से जुड़ जाते हैं।

🌬️ प्रदक्षिणापथ में रोशनी कैसे आती है?

कंदरिया के आंतरिक passage को बाहर की ओर खुलने वाले projection और balcony-like openings से प्रकाश और हवा मिलती है।

इसी कारण बाहरी दीवार एक सीधी बंद surface न रहकर अनेक projection और recess में विभाजित दिखाई देती है।

यही खजुराहो मंदिरों की जीवंत exterior rhythm का एक कारण है।

🧱 ऊँचे जगती पर मंदिर

कंदरिया एक ऊँचे जगती / terrace पर निर्मित है।

इससे मंदिर आसपास के धरातल से दृश्य रूप से ऊपर उठ जाता है।

जगती मंदिर की परिक्रमा, दर्शन और पूरी बाहरी मूर्ति-योजना देखने के लिए एक architectural base भी देती है।

🪨 बलुआ पत्थर की अद्भुत कारीगरी

कंदरिया महादेव मुख्यतः sandstone से निर्मित है।

इस पत्थर ने कारीगरों को बहुत सूक्ष्म नक्काशी करने की संभावना दी।

दूर से जो मंदिर एक विशाल पत्थर-पर्वत जैसा दिखता है, पास पहुँचने पर वही सतह असंख्य छोटी आकृतियों और ornament में बदल जाती है।

🎨 architecture और sculpture का अद्भुत संतुलन

UNESCO खजुराहो की सबसे बड़ी विशेषताओं में architecture और sculpture के संतुलन को रखता है।

कंदरिया में मूर्तियाँ मंदिर पर बाद में चिपकाई गई सजावट जैसी नहीं लगतीं।

वे दीवार के projection, recess, band और niche की पूरी architectural योजना का हिस्सा हैं।

दूर से देखिए — तो कंदरिया एक पर्वत है। पास जाइए — तो वही पर्वत हजारों मानव, देव, नर्तक और प्रतीकों की जीवित दुनिया बन जाता है।

🗿 मंदिर की मूर्तियों में क्या-क्या दिखाई देता है?

UNESCO खजुराहो की मूर्तिकला में धार्मिक और सांसारिक — दोनों प्रकार के विषय बताता है।

  • देव और देवियाँ
  • पूजा और धार्मिक अनुष्ठान
  • दिक्पाल और अन्य देव-समूह
  • नर्तक और संगीतकार
  • गुरु और शिष्य
  • दैनिक जीवन के दृश्य
  • सुरसुंदरियाँ और अलंकृत स्त्री आकृतियाँ
  • मिथुन एवं प्रेम-संबंधी प्रतीकात्मक दृश्य

🌺 सुरसुंदरी मूर्तियाँ

कंदरिया की सबसे पहचान योग्य मूर्ति-परंपराओं में सुंदर सुरसुंदरी आकृतियाँ हैं।

इनमें स्त्री आकृतियों को अलग-अलग सौंदर्य, नृत्य, श्रृंगार और दैनिक गतिविधियों से जुड़े भावों में दर्शाया गया है।

इनकी शारीरिक लय, आभूषण और मुद्रा चंदेल शिल्पकारों की असाधारण observation और stone carving skill दिखाती है।

💞 खजुराहो की मिथुन मूर्तियों को कैसे समझें?

📌 पूरे खजुराहो को केवल इन मूर्तियों से पहचानना गलत है

UNESCO खजुराहो की मूर्तियों में धार्मिक पूजा, देव-देवी, दैनिक जीवन, शिक्षक-शिष्य, नृत्य-संगीत, मानवीय संबंध और प्रेम से जुड़े अनेक विषयों का उल्लेख करता है।

मिथुन या काम-संबंधी आकृतियाँ इस बड़े sculptural programme का केवल एक हिस्सा हैं। मंदिर का वास्तविक महत्व उसकी नागर वास्तुकला, शैव धार्मिक योजना और संपूर्ण sculptural world को साथ देखकर समझ आता है।

🕉️ धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की व्यापक दृष्टि

मध्यकालीन भारतीय मंदिर कला मानवीय जीवन को केवल एक संकीर्ण धार्मिक दृश्य में प्रस्तुत नहीं करती।

खजुराहो में आध्यात्मिकता के साथ समाज, संगीत, नृत्य, सौंदर्य, मानवीय संबंध और सांसारिक जीवन भी शिल्प का हिस्सा हैं।

इसीलिए इस कला को मानव अनुभव की व्यापक सांस्कृतिक अभिव्यक्ति के रूप में देखना अधिक उचित है।

🔱 अंदर का गर्भगृह इतना सरल क्यों लगता है?

बाहर अत्यंत घनी मूर्ति-संपदा है।

लेकिन गर्भगृह का मुख्य आध्यात्मिक केंद्र शिवलिंग है।

यह एक सुंदर architectural contrast बनाता है —

बाहर जीवन की विविधता, और भीतर एकाग्र, शांत, केंद्रीय शिव-तत्त्व।

🌄 मुख्य शिखर और उरुशृंग

कंदरिया का मुख्य शिखर अकेला खड़ा नहीं है।

उसके चारों ओर अनेक छोटे उरुशृंग ऊपर की ओर संगठित ढंग से बढ़ते हैं।

इससे आँख स्वाभाविक रूप से नीचे से ऊपर मुख्य शिखर की ओर जाती है।

यही नागर architecture में ऊर्ध्व गति की असाधारण अनुभूति पैदा करता है।

🏔️ कैलास की स्थापत्य कल्पना

Madhya Pradesh Tourism कंदरिया की mountain-like form को भगवान शिव के कैलास निवास से जोड़ता है।

यहाँ मुख्य शिखर और उसके आसपास छोटे शिखरों की पर्वत-श्रेणी जैसी व्यवस्था इस धार्मिक symbolism को दृश्य रूप देती है।

📚 नागर वास्तुकला का परिपक्व रूप

UNESCO खजुराहो को उत्तरी भारतीय Nagara-style temple architecture की परिपक्व अवस्था का महत्वपूर्ण प्रमाण मानता है।

कंदरिया में ऊँचा curvilinear shikhara, बहु-projection plan, उरुशृंग, ऊँची jagati और घनी sculptural bands एक साथ दिखाई देते हैं।

🔄 द्रविड़ और नागर वास्तु में अंतर

द्रविड़ मंदिर कंदरिया का नागर रूप
पिरामिडाकार स्तरित विमान। ऊँचा curvilinear शिखर।
दक्षिण भारत में विकसित परंपरा। उत्तर-मध्य भारत की नागर परंपरा।
तंजावुर इसका महान उदाहरण। कंदरिया महादेव इसका परिपक्व उदाहरण।
साफ horizontal storeys अधिक स्पष्ट। ऊर्ध्व गति और clustered urushringas अधिक प्रमुख।

📐 कंदरिया कितना बड़ा है?

पुराने ASI survey के अनुसार मंदिर लगभग 109 फीट लंबा और 59½ फीट चौड़ा है।

मध्य प्रदेश पर्यटन इसके built area को लगभग 6,500 square feet बताता है।

ये numbers मंदिर के scale का अंदाजा देते हैं, लेकिन कंदरिया की वास्तविक अनुभूति उसकी height, projection और clustered tower composition से आती है।

🗿 मूर्तियों की संख्या पर स्रोत अलग क्यों?

सरकारी tourism sources कंदरिया में लगभग 800 से 900 के बीच मूर्तियों का उल्लेख करते हैं।

कुछ pages 870 के आसपास की संख्या देते हैं, जबकि दूसरे counts अलग method से किए गए हैं।

इसलिए “ठीक 870 ही” कहने के बजाय सैकड़ों अत्यंत सूक्ष्म sculptures कहना अधिक सुरक्षित है।

📌 counting method क्यों बदल सकता है?

क्या एक decorative figure अलग sculpture मानी जाए? क्या miniature panel एक गिना जाए या उसमें मौजूद हर figure अलग? ऐसी counting के कारण संख्या source-to-source बदल सकती है। इसलिए मुख्य महत्व कला की गुणवत्ता और programme की व्यापकता है, न कि केवल संख्या।

🌐 UNESCO World Heritage Site

Khajuraho Group of Monuments को 1986 में UNESCO World Heritage List में शामिल किया गया।

UNESCO इस property को चंदेल कला, नागर वास्तुकला और architecture-sculpture के अद्वितीय संतुलन के लिए महत्वपूर्ण मानता है।

कंदरिया महादेव इसी inscribed property की सबसे प्रसिद्ध मंदिर संरचनाओं में है।

🌐 सही UNESCO भाषा

कंदरिया महादेव

UNESCO World Heritage Site

Khajuraho Group of Monuments

का हिस्सा है।

🏛️ खजुराहो में कितने मंदिर बचे हैं?

UNESCO की current listing World Heritage property में 23 temples/structures का उल्लेख करती है।

पुराने और popular summaries “लगभग 20” या “लगभग 25” surviving temples भी लिखते हैं।

यह अंतर property boundary, partly excavated structures और broader Khajuraho area की counting के कारण आता है।

📌 इसलिए 85 में से ठीक कितने बचे — इसे सावधानी से लिखें

पुराने historical descriptions लगभग 85 original temples की परंपरा बताते हैं। आज UNESCO inscribed property में 23 मंदिर/संरचनाएँ गिनता है। इसलिए “मूल समूह का केवल एक हिस्सा आज सुरक्षित बचा है” सबसे सुरक्षित सामान्य भाषा है।

🛡️ ASI संरक्षण

UNESCO के अनुसार Khajuraho Group of Monuments भारत सरकार के अधीन है और इसका heritage management Archaeological Survey of India करता है।

Ancient Monuments and Archaeological Sites and Remains कानून के अंतर्गत स्मारक और उसके आसपास के protected तथा regulated zones की व्यवस्था की जाती है।

⚠️ संरक्षण की चुनौतियाँ

UNESCO Khajuraho के landscape और monuments के लिए आसपास के development pressure, dust और vibration जैसी संभावित चुनौतियों का उल्लेख करता है।

इतनी सूक्ष्म sandstone carving को सुरक्षित रखने के लिए weathering, pollution और physical damage से बचाव बहुत जरूरी है।

🙏 क्या कंदरिया आज सक्रिय पूजा मंदिर है?

कंदरिया महादेव की धार्मिक पहचान भगवान शिव के मंदिर की है।

लेकिन आज इसका मुख्य प्रशासनिक स्वरूप ASI-managed World Heritage monument का है।

खजुराहो के निकटवर्ती मतंगेश्वर मंदिर की living worship tradition अधिक स्पष्ट रूप से निरंतर सक्रिय मानी जाती है।

इसलिए कंदरिया को पुरातात्त्विक heritage monument और ऐतिहासिक शिव मंदिर — दोनों संदर्भों में समझना उचित है।

🎭 खजुराहो Dance Festival

Madhya Pradesh Tourism खजुराहो में प्रतिवर्ष आयोजित Khajuraho Dance Festival को क्षेत्र की महत्वपूर्ण सांस्कृतिक गतिविधि बताता है।

यह festival शास्त्रीय भारतीय नृत्य और मंदिरों की स्थापत्य पृष्ठभूमि के बीच एक आधुनिक सांस्कृतिक संवाद प्रस्तुत करता है।

🚉 कंदरिया महादेव कैसे पहुँचें?

📍 सामान्य यात्रा जानकारी

स्थान: Western Group of Temples, Khajuraho, Chhatarpur District, Madhya Pradesh

निकट रेलवे स्टेशन: Khajuraho Railway Station

हवाई संपर्क: Khajuraho Airport

छतरपुर जिला प्रशासन के अनुसार खजुराहो सड़क, रेल और हवाई मार्ग से जुड़ा हुआ है।

मंदिर के visitor timing और ticket व्यवस्था यात्रा के दिन ASI या official tourism source से verify कर लेना उचित है।

🕰️ सामान्य visitor timing

Madhya Pradesh Tourism कंदरिया महादेव और Western Group परिसर के लिए sunrise से sunset तक visitor access का सामान्य उल्लेख करता है।

लेकिन season, ticketing, conservation work या administrative arrangements के कारण समय बदल सकता है।

इसलिए यात्रा के दिन वर्तमान official information देखना बेहतर है।

📷 मंदिर देखते समय क्या ध्यान रखें?

  • मंदिर को केवल “काम-मूर्तियों वाला खजुराहो” समझकर न देखें।
  • मुख्य नागर शिखर और आसपास के उरुशृंग को पहले दूर से देखें।
  • अर्धमंडप से गर्भगृह तक axial progression पहचानें।
  • गर्भगृह के चारों ओर आंतरिक प्रदक्षिणापथ समझें।
  • देवता, नृत्य, संगीत, दैनिक जीवन और सुरसुंदरी panels अलग-अलग पहचानें।
  • प्राचीन sandstone sculpture को अनावश्यक रूप से न छुएँ।
  • दीवारों पर नाम या निशान न बनाएँ।
  • UNESCO property और ASI monument rules का पालन करें।

🔎 कंदरिया को सही क्रम में कैसे देखें?

सबसे पहले मंदिर से थोड़ी दूरी बनाकर उसकी पूरी silhouette देखिए।

मुख्य शिखर और आसपास के उरुशृंगों को एक पर्वत-समूह की तरह समझिए।

फिर ऊँची jagati पर चढ़कर बाहरी दीवारों की horizontal sculptural bands देखें।

इसके बाद अर्धमंडप, मंडप, महामंडप और अंतराल से गर्भगृह की ओर बढ़िए।

तभी यह समझ आएगा कि कंदरिया में architecture दर्शक को धीरे-धीरे एक बाहरी बहुरंगी संसार से अंदर के शांत शिव-केंद्र की ओर ले जाती है।

🔱 बाहरी विविधता और अंदर शिव

कंदरिया का सबसे गहरा architectural contrast यही है —

बाहर सैकड़ों आकृतियों वाला जीवन का विशाल संसार है।

लेकिन अंदर शिवलिंग के रूप में एक सरल और एकाग्र आध्यात्मिक केंद्र।

यह मंदिर को केवल sculpture gallery नहीं, बल्कि धार्मिक यात्रा में बदल देता है।

🏔️ शिखर का आध्यात्मिक भाव

नागर शिखर दृष्टि को लगातार ऊपर उठाता है।

छोटे उरुशृंग मुख्य शिखर की ओर एक दृश्य प्रवाह बनाते हैं।

शिव के कैलास निवास की पर्वतीय कल्पना इस architecture में रूपक के रूप में अनुभव की जा सकती है।

🌿 कंदरिया की सबसे बड़ी ऐतिहासिक सीख

कंदरिया महादेव हमें दिखाता है कि 11वीं शताब्दी तक उत्तर भारतीय नागर मंदिर architecture कितना विकसित हो चुका था।

यहाँ वास्तुकला, मूर्ति, कथा, मानवीय जीवन और धार्मिक symbolism अलग-अलग चीजें नहीं रह जाते।

सभी एक संयुक्त visual universe में मिल जाते हैं।

🔱 कंदरिया महादेव हमें क्या सिखाता है?

पहले उसके ऊँचे शिखर को देखिए — और उसके चारों ओर उठते छोटे उरुशृंग पहचानिए।

समझिए कि एक stone temple कैसे पर्वत जैसा दिखाई दे सकता है।

बाहरी मूर्तियों को देखिए — देवता, नर्तक, संगीतकार, सुरसुंदरी और मानव जीवन के अनेक दृश्य।

फिर अंदर के शांत शिवलिंग तक जाइए — और समझिए कि बाहरी विविधता अंततः एक आध्यात्मिक केंद्र की ओर ले जाती है।

कंदरिया को केवल उसकी कुछ प्रसिद्ध मूर्तियों से मत पहचानिए। उसका वास्तविक महत्व architecture, sculpture, religious symbolism और Chandela craftsmanship के संपूर्ण संतुलन में है।

कंदरिया महादेव मंदिर 11वीं शताब्दी की चंदेल नागर वास्तुकला, शैव परंपरा और भारतीय मूर्तिकला की एक महान विश्व धरोहर कृति है।

🔱 हर हर महादेव
📚 इस लेख के प्रमुख तथ्य-स्रोत

खजुराहो के 950–1050 ईस्वी के Chandela temple phase, Nagara architecture, architecture-sculpture balance, religious और secular sculptural themes, World Heritage status और ASI management के लिए UNESCO World Heritage Centre की official Khajuraho documentation को मुख्य आधार बनाया गया है।

कंदरिया के 1025–1050 ईस्वी के सामान्य काल, Shiva dedication, mountain-like composition, Western Group location और visitor information के लिए Madhya Pradesh Tourism की सामग्री का उपयोग किया गया है।

अर्धमंडप, मंडप, महामंडप, अंतराल, गर्भगृह, प्रदक्षिणापथ, पुराने dimensions और architectural plan के लिए Archaeological Survey of India से जुड़े IGNCA archival studies का सहारा लिया गया है।

Khajuraho के जिला-स्तरीय location, road, rail, air connectivity और surviving temple group की सामान्य जानकारी के लिए Chhatarpur District Administration का official page उपयोग किया गया है।

मंदिर के specific patron attribution में सरकारी tourism pages के अलग-अलग विवरण मिलने के कारण लेख में एक definitive disputed claim के बजाय सावधान historical wording रखी गई है।

🚩 Bhakti Bhavna — अब चोल दक्षिण से चंदेल मध्य भारत तक

पिछले तीन भागों में हमने Great Living Chola Temples की द्रविड़ यात्रा देखी।

अब कंदरिया महादेव हमें एक अलग architectural world में ले आता है — उत्तर-मध्य भारत की परिपक्व नागर शैली।

यहाँ ऊँचाई का अर्थ पिरामिडाकार विमान नहीं, बल्कि वक्र शिखर और उरुशृंगों का पर्वताकार समूह है।

और मूर्तिकला में देव और मानव, आध्यात्मिक और सांसारिक, नृत्य और पूजा — सभी एक ही architectural surface पर मिलते हैं।

जहाँ UNESCO स्पष्ट तथ्य देता है, उसे backbone बनाएँगे। जहाँ patron attribution में official sources अलग हैं, वहाँ uncertainty छिपाएँगे नहीं। और जहाँ खजुराहो के बारे में एक ही प्रकार की मूर्तियों को लेकर अतिशयोक्ति होती है, वहाँ पूरे architectural और cultural context को सामने रखेंगे।

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