श्री भैरव चालीसा हिंदी अर्थ सहित | Bhairav Chalisa

🔱 श्री भैरव चालीसा

श्री भैरव चालीसा भगवान शिव के भैरव स्वरूप की स्तुति है। इसमें काल भैरव, बटुक भैरव, काशी के कोतवाल स्वरूप और भक्त की प्रार्थना का वर्णन मिलता है। नीचे प्रचलित श्री भैरव चालीसा सरल हिंदी भावार्थ सहित प्रस्तुत है।

॥ दोहा ॥
श्री गणपति गुरु गौरी पद, प्रेम सहित धरि माथ।
चालीसा वंदन करौं, श्री शिव भैरवनाथ॥

श्री भैरव संकट हरण, मंगल करण कृपाल।
श्याम वरण विकराल वपु, लोचन लाल विशाल॥

अर्थ: श्रीगणेश, गुरु और माता गौरी को प्रणाम करके भक्त भगवान भैरवनाथ की स्तुति करता है। वह उन्हें संकट हरने वाले और मंगलकारी प्रभु के रूप में नमन करता है।

जय जय श्री काली के लाला।
जयति जयति काशी-कुतवाला॥

अर्थ: माँ काली के प्रिय और काशी के रक्षक भगवान भैरव की बारंबार जय हो।

जयति बटुक भैरव भय हारी।
जयति काल भैरव बलकारी॥

अर्थ: भय हरने वाले बटुक भैरव और शक्तिशाली काल भैरव की जय हो।

जयति नाथ भैरव विख्याता।
जयति सर्व भैरव सुखदाता॥

अर्थ: प्रसिद्ध भैरवनाथ और भक्तों को कल्याण प्रदान करने वाले प्रभु की जय हो।

भैरव रूप कियो शिव धारण।
भव के भार उतारण कारण॥

अर्थ: भगवान शिव ने संसार के कल्याण और अधर्म के भार को दूर करने के लिए भैरव स्वरूप धारण किया।

भैरव रव सुनि हवै भय दूरी।
सब विधि होय कामना पूरी॥

अर्थ: भैरवनाथ का स्मरण भक्त के मन में साहस और विश्वास जगाता है तथा वह अपनी शुभ कामनाएँ प्रभु को समर्पित करता है।

शेष महेश आदि गुण गायो।
काशी-कोतवाल कहलायो॥

अर्थ: देवता भी भैरवनाथ के गुणों का गान करते हैं और परंपरा में उन्हें काशी का कोतवाल कहा जाता है।

जटा जूट शिर चन्द्र विराजत।
बाला मुकुट बिजायठ साजत॥

अर्थ: उनके मस्तक पर जटाएँ, चन्द्रमा और दिव्य मुकुट शोभित हैं।

कटि करधनी घुंघरू बाजत।
दर्शन करत सकल भय भाजत॥

अर्थ: भैरवनाथ के दिव्य स्वरूप के दर्शन से भक्त अपने भय को छोड़कर निर्भयता और भक्ति का अनुभव करता है।

जीवन दान दास को दीन्ह्यो।
कीन्ह्यो कृपा नाथ तब चीन्ह्यो॥

अर्थ: भक्त प्रभु की कृपा को जीवन में आशा और संरक्षण प्रदान करने वाली मानता है।

वसि रसना बनि सारद-काली।
दीन्ह्यो वर राख्यो मम लाली॥

अर्थ: भक्त प्रार्थना करता है कि माता सरस्वती और देवी शक्ति की कृपा से उसकी वाणी पवित्र और भक्तिमय बने।

धन्य धन्य भैरव भय भंजन।
जय मनरंजन खल दल भंजन॥

अर्थ: भय दूर करने और अधर्म का नाश करने वाले भैरवनाथ धन्य हैं।

कर त्रिशूल डमरू शुचि कोड़ा।
कृपा कटाक्ष सुयश नहिं थोड़ा॥

अर्थ: त्रिशूल और डमरू से युक्त भैरवनाथ का स्वरूप शिवतत्व और शक्ति का प्रतीक है।

जो भैरव निर्भय गुण गावत।
अष्टसिद्धि नव निधि फल पावत॥

अर्थ: फलश्रुति में श्रद्धापूर्वक भैरवनाथ के गुण गाने वाले भक्त के कल्याण और समृद्धि की कामना की गई है।

रूप विशाल कठिन दुख मोचन।
क्रोध कराल लाल दुहुं लोचन॥

अर्थ: उनका विशाल और तेजस्वी स्वरूप अन्याय के प्रति कठोर तथा भक्तों के प्रति कृपालु बताया गया है।

अगणित भूत प्रेत संग डोलत।
बम बम बम शिव बम बम बोलत॥

अर्थ: इस पद में भैरवनाथ के उग्र शिवस्वरूप और उनके गणों का पारंपरिक वर्णन किया गया है।

रुद्रकाय काली के लाला।
महाकालहू के हो काला॥

अर्थ: भैरवनाथ को रुद्रस्वरूप और काल से भी परे परम शक्ति के रूप में स्तुति की गई है।

बटुक नाथ हो काल गंभीरा।
श्वेत रक्त अरु श्याम शरीरा॥

अर्थ: भैरवनाथ के बटुक तथा विभिन्न रंग-स्वरूपों का पारंपरिक वर्णन किया गया है।

करत तीनहूँ रूप प्रकाशा।
भरत सुभक्तन कहँ शुभ आशा॥

अर्थ: भगवान के विभिन्न स्वरूप भक्तों में शुभता, साहस और आशा का भाव उत्पन्न करते हैं।

रत्न जड़ित कंचन सिंहासन।
व्याघ्र चर्म शुचि नर्म सुआसन॥

अर्थ: रत्नजड़ित सिंहासन और व्याघ्रचर्म पर विराजमान भैरवनाथ के दिव्य स्वरूप का वर्णन है।

तुमहि जाइ काशिहिं जन ध्यावहिं।
विश्वनाथ कहँ दर्शन पावहिं॥

अर्थ: काशी में भक्त भैरवनाथ का स्मरण करते हुए भगवान विश्वनाथ के दर्शन की परंपरा का पालन करते हैं।

जय प्रभु संहारक सुनन्द जय।
जय उन्नत हर उमानन्द जय॥

अर्थ: शिव के विविध भैरव रूपों को प्रणाम करते हुए उनकी जय बोली गई है।

भीम त्रिलोचन स्वान साथ जय।
वैजनाथ श्री जगतनाथ जय॥

अर्थ: त्रिनेत्रधारी और श्वान के साथ विराजमान भैरव सहित विभिन्न दिव्य स्वरूपों की स्तुति है।

महा भीम भीषण शरीर जय।
रुद्र त्र्यम्बक धीर वीर जय॥

अर्थ: महान रुद्र, त्र्यम्बक, धीर और वीर भगवान भैरव के शक्तिशाली स्वरूप की जय हो।

अश्वनाथ जय प्रेतनाथ जय।
स्वानारूढ़ सयचन्द्र नाथ जय॥

अर्थ: भगवान भैरव के विभिन्न नाम और स्वरूपों का स्मरण करते हुए उनकी जय बोली गई है।

निमिष दिगम्बर चक्रनाथ जय।
गहत अनाथन नाथ हाथ जय॥

अर्थ: दिगम्बर भैरव को अनाथ और शरणागत भक्तों का सहारा मानकर प्रणाम किया गया है।

त्रेशलेश भूतेश चन्द्र जय।
क्रोध वत्स अमरेश नन्द जय॥

अर्थ: भैरवनाथ के अनेक पारंपरिक नामों और रूपों का स्तवन किया गया है।

श्री वामन नकुलेश चण्ड जय।
कृत्याऊ कीरति प्रचण्ड जय॥

अर्थ: प्रभु के विविध भैरव स्वरूपों की प्रचंड शक्ति और कीर्ति का गुणगान किया गया है।

रुद्र बटुक क्रोधेश कालधर।
चक्र तुण्ड दश पाणिव्याल धर॥

अर्थ: रुद्र, बटुक और कालस्वरूप भैरव की अनेक शक्तियों का प्रतीकात्मक वर्णन है।

करि मद पान शम्भु गुणगावत।
चौंसठ योगिन संग नचावत॥

अर्थ: यह भैरव उपासना की पारंपरिक तांत्रिक-शैव प्रतीकात्मकता और चौंसठ योगिनियों से जुड़े स्वरूप का उल्लेख करता है।

करत कृपा जन पर बहु ढंगा।
काशी कोतवाल अड़बंगा॥

अर्थ: काशी के कोतवाल भैरवनाथ भक्तों पर अनेक प्रकार से कृपा करने वाले माने गए हैं।

देयं काल भैरव जब सोटा।
नसै पाप मोटा से मोटा॥

अर्थ: भक्त प्रभु के न्याय और अनुशासन को अपने दोषों तथा गलत कर्मों से दूर होने की प्रेरणा मानता है।

जनकर निर्मल होय शरीरा।
मिटै सकल संकट भव पीरा॥

अर्थ: भैरव उपासना में भक्त अपने जीवन की कठिनाइयों से राहत और अंतःकरण की शुद्धि की प्रार्थना करता है।

श्री भैरव भूतों के राजा।
बाधा हरत करत शुभ काजा॥

अर्थ: भैरवनाथ को शिवगणों के अधिपति और विघ्नों को दूर कर शुभ मार्ग दिखाने वाले देवता के रूप में प्रणाम किया गया है।

ऐलादी के दुःख निवारयो।
सदा कृपा करि काज सम्हारयो॥

अर्थ: भक्त भगवान की निरंतर कृपा और जीवन के कठिन कार्यों में मार्गदर्शन की प्रार्थना करता है।

सुन्दरदास सहित अनुरागा।
श्री दुर्वासा निकट प्रयागा॥

अर्थ: रचनाकार सुंदरदास श्रद्धा और अनुराग के साथ भगवान भैरव की स्तुति करते हैं।

श्री भैरव जी की जय लेख्यो।
सकल कामना पूरण देख्यो॥

अर्थ: अंत में भगवान भैरव की जय बोलते हुए भक्त अपनी शुभ कामनाएँ उनके चरणों में समर्पित करता है।

॥ समापन दोहा ॥
जय जय जय भैरव बटुक, स्वामी संकट टार।
कृपा दास पर कीजिए, शंकर के अवतार॥

जो यह चालीसा पढ़े, प्रेम सहित सत बार।
उस घर सर्वानन्द हो, वैभव बढ़े अपार॥

अर्थ: भक्त बटुक भैरव से अपने संकट दूर करने और कृपा करने की प्रार्थना करता है। फलश्रुति में प्रेम और श्रद्धा से पाठ करने वाले भक्त के घर सुख और कल्याण की कामना की गई है।

🌼 भक्ति भावना

श्री भैरव चालीसा का पाठ भय के भाव से नहीं, बल्कि भगवान शिव के भैरव स्वरूप के प्रति श्रद्धा, आत्मसंयम और सद्कर्म के भाव से करें। भक्ति का उद्देश्य मन में साहस, अनुशासन और ईश्वर के प्रति समर्पण बढ़ाना है।

जय बाबा भैरवनाथ 🔱
जय काल भैरव 🙏
भक्ति भावना • भक्ति • धर्म • भारतीय संस्कृति

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