श्री गणेश आरती: जय गणेश जय गणेश देवा, अर्थ सहित | Ganesh Aarti
“जय गणेश जय गणेश देवा” भगवान श्री गणेश की अत्यंत प्रसिद्ध पारंपरिक आरती है। इसमें गणपति जी के एकदंत स्वरूप, माता पार्वती और भगवान शिव से उनके संबंध, उनकी करुणा तथा विघ्नहर्ता रूप का भक्तिपूर्वक स्मरण किया गया है।
आराध्य: भगवान श्री गणेश
प्रमुख भाव: मंगल, बुद्धि, विनम्रता और विघ्नों से मुक्ति की प्रार्थना
विशेष अवसर: गणेश चतुर्थी, बुधवार और गणपति पूजा
सरल मंत्र: ॐ गं गणपतये नमः॥
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
एकदंत दयावंत चार भुजा धारी।
माथे सिंदूर सोहे मूसे की सवारी॥
पान चढ़े फूल चढ़े और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे संत करें सेवा॥
अंधन को आँख देत कोढ़िन को काया।
बाँझन को पुत्र देत निर्धन को माया॥
सूर श्याम शरण आए सफल कीजे सेवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
यह पारंपरिक आरती अलग-अलग क्षेत्रों और भक्ति-पुस्तकों में कुछ छोटे शब्द-पाठभेदों के साथ मिलती है। कहीं “मूषक की सवारी” तो कहीं “मूसे की सवारी” जैसे रूप मिलते हैं। आरती का मूल भाव समान रहता है।
इस आरती में भगवान गणेश के स्वरूप, उनकी करुणा, भक्तों के प्रति कृपा और माता पार्वती तथा भगवान शिव के पुत्र होने का स्मरण किया गया है।
भक्त भगवान गणेश की जय बोलते हुए उन्हें माता पार्वती और भगवान महादेव के पुत्र के रूप में प्रणाम करता है।
यहाँ भगवान गणेश के एकदंत, दयालु और चार भुजाओं वाले प्रसिद्ध स्वरूप का वर्णन है। उनका वाहन मूषक माना जाता है।
इस पद में भक्त भगवान गणेश को प्रेमपूर्वक फूल, फल और लड्डू अर्पित करते हुए उनकी सेवा और पूजा का भाव प्रकट करता है।
यह पंक्ति भगवान की करुणा और भक्त की आशा का काव्यात्मक वर्णन करती है। भक्त गणेश जी से दुःख में सहारा, जीवन में मंगल और कृपा की प्रार्थना करता है।
भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और बुद्धि के देवता के रूप में पूजा जाता है।
गणेश भक्ति हमें किसी भी नए कार्य की शुरुआत विवेक, नम्रता, धैर्य और शुभ संकल्प के साथ करने की प्रेरणा देती है।
भगवान गणेश की आरती सामान्य भक्ति में किसी भी दिन की जा सकती है।
बुधवार, गणेश चतुर्थी और गणपति उत्सव में यह आरती विशेष रूप से लोकप्रिय है।
किसी नए शुभ कार्य या सामान्य गणेश पूजा के अंत में भी श्रद्धापूर्वक आरती की जा सकती है।
भगवान गणेश के सामने श्रद्धापूर्वक बैठें। सामान्य पूजा, गणेश मंत्र या गणेश चालीसा के बाद दीपक जलाकर आरती की जा सकती है।
आरती करते समय भगवान से केवल कार्य सफल होने की प्रार्थना न करें, बल्कि सही निर्णय लेने की बुद्धि और धैर्य भी माँगें।
गणपति बप्पा मोरया 🙏
“जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा” भगवान गणेश की सबसे प्रसिद्ध पारंपरिक आरतियों में से एक है।
हाँ। सामान्य गणेश पूजा में मंत्र-जप के बाद श्रद्धापूर्वक आरती की जा सकती है।
नहीं। बुधवार गणेश पूजा से विशेष रूप से जुड़ा है, लेकिन सामान्य भक्ति में आरती किसी भी दिन की जा सकती है।
धार्मिक परंपरा में मोदक और लड्डू भगवान गणेश के प्रिय नैवेद्य माने जाते हैं, इसलिए उनकी पूजा और आरती में इनका उल्लेख मिलता है।
भगवान गणेश की भक्ति हमें सिखाती है कि किसी भी कार्य की शुरुआत केवल उत्साह से नहीं, बल्कि बुद्धि, धैर्य और विनम्रता के साथ करनी चाहिए। बाधा आने पर घबराने के बजाय सही मार्ग खोजते हुए आगे बढ़ना गणेश भक्ति का सुंदर जीवन-संदेश है।
भक्ति भावना पर श्री गणेश चालीसा, श्री गणेश मंत्र संग्रह और अन्य गणपति भक्ति सामग्री भी पढ़ सकते हैं।
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