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श्रीरामचरितमानस बालकाण्ड भाग 5 | श्रीराम नाम की महिमा और नाम-रूप रहस्य अर्थ सहित

🚩 भक्ति भावना प्रस्तुत श्रीरामचरितमानस बालकाण्ड • भाग 5 श्रीराम नाम की महिमा • नाम-रूप रहस्य • निर्गुण-सगुण • पहला विश्राम यह भाग पिछले भाग के दोहा 18 के बाद से आरंभ होकर रामनाम की महिमा के विस्तृत प्रसंग को दोहा 25 — पहले विश्राम — तक क्रमबद्ध रूप से प्रस्तुत करता है। श्रीराम नाम की वंदना बंदउँ नाम राम रघुबर को। हेतु कृसानु भानु हिमकर को॥ बिधि हरि हरमय बेद प्रान सो। अगुन अनूपम गुन निधान सो॥ सरल अर्थ — तुलसीदासजी श्रीरघुनाथजी के रामनाम की वंदना करते हैं। यह नाम ब्रह्मा, विष्णु और शिवमय, वेदों का प्राण और अनुपम गुणों का भंडार कहा गया है। रामनाम महामंत्र महामंत्र जोइ जपत महेसू। कासीं मुकुति हेतु उपदेसू॥ महिमा जासु जान गनराऊ। प्रथम पूजिअत नाम प्रभाऊ॥ सरल अर्थ — भगवान शिव जिस महामंत्र का जप करते हैं, उसी रामनाम की महिमा का वर्णन यहाँ किया गया है। वाल्मीकि और पार्वती जान आदिकबि नाम प्रतापू। भयउ सुद्ध करि उलटा जापू॥ सहस नाम सम सुनि सिव बानी। जपि जेईं पिय संग भवानी॥ सरल अर्थ — आदिकवि वाल्मीकि और माता पार्वती के प्रसंग द्वारा रामनाम के प्रताप और श्रद्धापूर्ण जप की महि...

श्रीरामचरितमानस बालकाण्ड भाग 4 | सरस्वती-गंगा, अयोध्या, हनुमान और सीताराम वंदना अर्थ सहित

🚩 भक्ति भावना प्रस्तुत श्रीरामचरितमानस बालकाण्ड • भाग 4 सरस्वती-गंगा • अयोध्या • रामपरिवार • हनुमान • सीताराम वंदना इस भाग में सरस्वती-गंगा वंदना से लेकर दोहा 18 में श्रीसीताराम की संयुक्त वंदना तक का प्रसंग क्रमबद्ध रूप से दिया गया है। मूल पाठ बड़े ग्रंथ-अक्षरों में तथा नीचे सरल हिंदी अर्थ के साथ है। सरस्वती और गंगा वंदना पुनि बंदउँ सारद सुरसरिता। जुगल पुनीत मनोहर चरिता॥ मज्जन पान पाप हर एका। कहत सुनत एक हर अबिबेका॥ सरल अर्थ — तुलसीदासजी माता सरस्वती और गंगाजी की वंदना करते हैं। गंगाजी का पवित्र जल पापों को हरने वाला और सरस्वती की ज्ञानमयी वाणी अज्ञान को दूर करने वाली कही गई है। शिव-पार्वती वंदना गुर पितु मातु महेस भवानी। प्रनवउँ दीनबंधु दिन दानी॥ सेवक स्वामि सखा सिय पी के। हित निरुपधि सब बिधि तुलसीके॥ सरल अर्थ — भगवान शिव और माता पार्वती को गुरु, माता-पिता और निष्कपट हितैषी मानकर प्रणाम किया गया है। शिव-कृपा कलि बिलोकि जग हित हर गिरिजा। साबर मंत्र जाल जिन्ह सिरिजा॥ अनमिल आखर अरथ न जापू। प्रगट प्रभाउ महेस प्रतापू॥ सरल अर्थ — कलियुग में जीवों के कल्याण के लिए शिव-पा...