श्री हनुमान मंत्र संग्रह: प्रमुख मंत्र, अर्थ और जप विधि | Hanuman Mantra
श्री हनुमान जी शक्ति, बुद्धि, भक्ति, सेवा, साहस और श्रीराम के प्रति पूर्ण समर्पण के आदर्श माने जाते हैं। इस मंत्र संग्रह में हनुमान जी के प्रमुख और प्रचलित मंत्र, उनके सरल हिंदी अर्थ तथा सामान्य भक्तिपूर्ण जप-विधि एक ही स्थान पर दी गई है।
① हनुमान मूल मंत्र
② हनुमान गायत्री मंत्र
③ मनोजवं मारुततुल्यवेगम् मंत्र
④ अतुलितबलधामम् स्तुति मंत्र
⑤ आञ्जनेय महाबल मंत्र
⑥ हनुमान जी के द्वादश नाम मंत्र
⑦ सरल हनुमान नाम-जप
⑧ सामान्य जप-विधि और महत्वपूर्ण बातें
सरल अर्थ: मैं श्री हनुमान जी को श्रद्धापूर्वक प्रणाम करता हूँ।
भक्ति-भाव: यह छोटा और सरल मंत्र है। हनुमान जी का सामान्य नाम-स्मरण करना हो तो इसे आसानी से जपा जा सकता है।
तन्नो हनुमत् प्रचोदयात्॥
सरल अर्थ: हम अंजनीपुत्र और वायुपुत्र हनुमान जी का ध्यान करते हैं। वे हमारी बुद्धि को सद्बुद्धि, ज्ञान और धर्म के मार्ग की ओर प्रेरित करें।
भक्ति-भाव: बुद्धि, विवेक, एकाग्रता और श्री हनुमान जी के प्रति श्रद्धा के लिए प्रार्थना।
वातात्मजम् वानरयूथमुख्यम् श्रीरामदूतम् शरणम् प्रपद्ये॥
सरल अर्थ: मैं उन श्री हनुमान जी की शरण लेता हूँ जो मन के समान तीव्र, वायु के समान वेगवान, इंद्रियों पर नियंत्रण रखने वाले, बुद्धिमानों में श्रेष्ठ, वायुपुत्र और श्रीराम के दूत हैं।
भक्ति-भाव: यह मंत्र हनुमान जी की शक्ति के साथ-साथ उनके संयम, बुद्धि और श्रीराम-सेवा के गुणों का ध्यान कराता है।
दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्।
सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं
रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि॥
सरल अर्थ: मैं वायुपुत्र हनुमान जी को प्रणाम करता हूँ, जो अतुलनीय बल के धाम, ज्ञानियों में श्रेष्ठ, सद्गुणों के भंडार और श्रीराम के परम प्रिय भक्त हैं।
विशेष भाव: इस स्तुति में केवल शारीरिक शक्ति नहीं, बल्कि ज्ञान, सद्गुण और प्रभु-भक्ति को भी हनुमान जी की महानता बताया गया है।
सरल अर्थ: महाबली अंजनीपुत्र भगवान हनुमान को नमस्कार और पूर्ण समर्पण।
नोट: लंबे या विशिष्ट मंत्रों के जप की अलग-अलग परंपराओं में अलग विधियाँ हो सकती हैं। सामान्य भक्त इसे श्रद्धापूर्वक स्तुति के रूप में पढ़ सकता है; विशेष अनुष्ठान के लिए अपने गुरु या परंपरा की विधि मानना उचित है।
हनुमान जी के बारह प्रसिद्ध नामों का स्मरण भी किया जाता है। हर नाम उनके किसी विशेष गुण या रामायण प्रसंग को स्मरण कराता है।
2. ॐ अञ्जनीसुताय नमः।
3. ॐ वायुपुत्राय नमः।
4. ॐ महाबलाय नमः।
5. ॐ रामेष्ठाय नमः।
6. ॐ फाल्गुणसखाय नमः।
7. ॐ पिङ्गाक्षाय नमः।
8. ॐ अमितविक्रमाय नमः।
9. ॐ उदधिक्रमणाय नमः।
10. ॐ सीताशोकविनाशनाय नमः।
11. ॐ लक्ष्मणप्राणदात्रे नमः।
12. ॐ दशग्रीवदर्पघ्नाय नमः।
भावार्थ: इन नामों में हनुमान जी को अंजनीपुत्र, वायुपुत्र, महाबली, श्रीराम के प्रिय, अर्जुन के मित्र, समुद्र लांघने वाले, माता सीता का शोक दूर करने वाले और लक्ष्मण जी के प्राणरक्षक रूप में स्मरण किया गया है।
जो व्यक्ति संस्कृत के लंबे मंत्र सहजता से न पढ़ पाए, वह भी सरल नाम-स्मरण कर सकता है।
जय बजरंगबली 🚩
जय श्रीराम के दूत हनुमान
भक्ति में कठिन मंत्र से अधिक महत्वपूर्ण मन की श्रद्धा और नियमित ईश्वर-स्मरण है।
स्नान या हाथ-मुँह धोकर स्वच्छ स्थान पर शांत मन से बैठें। श्रीराम और हनुमान जी का स्मरण करें। अपनी सुविधा के अनुसार किसी एक मंत्र का स्पष्ट उच्चारण करें।
11, 21 या 108 बार जप करने की परंपरा कई भक्तों में प्रचलित है, लेकिन हर मंत्र के लिए कोई एक संख्या अनिवार्य नहीं है। नियमितता और श्रद्धा अधिक महत्वपूर्ण हैं।
मंगलवार और शनिवार हनुमान उपासना से विशेष रूप से जुड़े लोकप्रिय दिन हैं, लेकिन हनुमान जी का नाम किसी भी दिन श्रद्धापूर्वक लिया जा सकता है।
हनुमान जी से संबंधित अनेक बीज, तांत्रिक और विशिष्ट अनुष्ठान-मंत्र भी विभिन्न परंपराओं में मिलते हैं। इस संग्रह में जानबूझकर सामान्य भक्तों के लिए प्रमुख, प्रचलित और सरल मंत्र रखे गए हैं।
विशेष दीक्षा या जटिल साधना वाले मंत्रों के लिए अपनी धार्मिक परंपरा और योग्य गुरु का मार्गदर्शन लेना बेहतर है।
“ॐ श्री हनुमते नमः॥” एक बहुत सरल और प्रचलित हनुमान मूल मंत्र है।
हाँ। सामान्य नाम-स्मरण और सरल मंत्र श्रद्धापूर्वक नियमित रूप से पढ़े जा सकते हैं।
हनुमान गायत्री मंत्र में विशेष रूप से हनुमान जी से बुद्धि को सही दिशा में प्रेरित करने की प्रार्थना की जाती है।
हनुमान जी की भक्ति का सार केवल शक्ति माँगना नहीं है। उनके जीवन से सेवा, विनम्रता, ब्रह्मचर्य, बुद्धि, साहस और अपने आराध्य श्रीराम के प्रति पूर्ण समर्पण सीखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
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