माँ दुर्गा जयन्ती मङ्गला स्तुति — मंत्र, हिंदी अर्थ, महत्व एवं जप विधि

भक्ति भावना • देवी मंत्र संग्रह • भाग 03

माँ दुर्गा जयन्ती मङ्गला स्तुति

अर्गला स्तोत्र की प्रसिद्ध देवी वंदना — शुद्ध पाठ, हिंदी अर्थ, प्रत्येक नाम का अर्थ, धार्मिक महत्व और सरल जप विधि

माँ दुर्गा सिंह पर विराजमान, जयन्ती मङ्गला काली स्तुति शुद्ध संस्कृत पाठ और हिंदी अर्थ सहित — भक्ति भावना
माँ दुर्गा जयन्ती मङ्गला स्तुति — संस्कृत पाठ एवं हिंदी अर्थ

माँ दुर्गा के अनेक दिव्य नामों में जयन्ती, मङ्गला, काली, भद्रकाली और कपालिनी विशेष रूप से पूजनीय हैं। श्री दुर्गासप्तशती से जुड़े अर्गला स्तोत्र की यह प्रसिद्ध वंदना माँ के कल्याणकारी, रक्षक और करुणामयी स्वरूपों को एक साथ प्रणाम करती है। यहाँ इसका शुद्ध पाठ, सरल अर्थ और पूजा में उपयोग की जानकारी प्रस्तुत है।

01 / मूल पाठ

ॐ जयन्ती मङ्गला काली — शुद्ध मंत्र

॥ श्री अर्गला स्तोत्र की देवी वंदना ॥
ॐ जयन्ती मङ्गला काली
भद्रकाली कपालिनी।
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री
स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु ते॥
स्रोत: श्री दुर्गासप्तशती में सम्मिलित अर्गला स्तोत्र

इस मंत्र का संस्कृत पाठ फोटो के अतिरिक्त यहाँ अलग यूनिकोड टेक्स्ट में भी दिया गया है, ताकि पाठक इसे आसानी से पढ़ और कॉपी कर सकें।

02 / हिंदी अर्थ

मंत्र का सरल हिंदी अर्थ

हे माँ जयन्ती, मङ्गला, काली, भद्रकाली, कपालिनी, दुर्गा, क्षमा, शिवा, धात्री, स्वाहा और स्वधा स्वरूपिणी देवी! आपको मेरा बार-बार नमस्कार है।

भावार्थ: भक्त माँ जगदम्बा के विभिन्न दिव्य रूपों—विजय, शुभता, संरक्षण, क्षमा और पालन-पोषण के रूपों—को नमन करता है।

03 / शब्दार्थ

मंत्र के 11 दिव्य नामों का अर्थ

जयन्ती
विजय का स्वरूप; सफलता एवं जय की अधिष्ठात्री देवी।
मङ्गला
समस्त शुभ और मंगल का स्वरूप।
काली
देवी का काल-स्वरूप और अधर्म-अज्ञान के विनाश से जुड़ा रूप।
भद्रकाली
रक्षा और कल्याण का उग्र किंतु शुभकारी रूप।
कपालिनी
कपाल धारण करने वाली देवी का एक पारंपरिक नाम।
दुर्गा
कष्टों तथा दुर्गति से पार कराने वाली माता।
क्षमा
करुणा और क्षमाशीलता का स्वरूप।
शिवा
मंगलमयी, कल्याणस्वरूपा देवी।
धात्री
जगत को धारण एवं पोषण करने वाली शक्ति।
स्वाहा
देवताओं के निमित्त अग्नि में दी जाने वाली आहुति से जुड़ी दिव्य शक्ति।
स्वधा
पितरों के निमित्त अर्पण से जुड़ी दिव्य शक्ति।
04 / ग्रंथ परिचय

अर्गला स्तोत्र में इस मंत्र का स्थान

यह श्लोक अर्गला स्तोत्र में आता है, जिसे चण्डीपाठ अथवा दुर्गासप्तशती-पाठ की परंपरा से जोड़ा जाता है। यह देवी के अनेक रूपों की एक साथ स्तुति करने का सुंदर उदाहरण है।

पाठभेद की जानकारी: कुछ प्रचलित संस्करणों में “दुर्गा शिवा क्षमा धात्री” भी मिलता है। इस लेख में आपकी चित्र-पोस्ट में प्रयुक्त “दुर्गा क्षमा शिवा धात्री” वाला पाठ रखा गया है; दोनों पाठ परंपरागत स्रोतों में मिलते हैं।

05 / महत्व

जयन्ती-मङ्गला स्तुति का धार्मिक महत्व

जयन्ती-मङ्गला स्तुति में देवी की विजयमयी शक्ति के साथ उनका करुणा और शांति देने वाला स्वरूप भी प्रकट होता है। इसका पाठ विशेषतः नवरात्रि, दुर्गा पूजा और दैनिक देवी आराधना के अवसर पर किया जाता है।

यह श्लोक भक्त को स्मरण कराता है कि शक्ति केवल पराक्रम नहीं है; वह क्षमा, धैर्य, संरक्षण और जगत के पालन में भी प्रकट होती है।

06 / जप विधि

घर पर मंत्र जप की सरल विधि

  1. शांत और स्वच्छ स्थान पर बैठकर माँ दुर्गा का स्मरण करें।
  2. इच्छानुसार माँ के चित्र के सामने पुष्प या दीप अर्पित करें।
  3. मंत्र के प्रत्येक शब्द का उच्चारण स्पष्ट और आदरपूर्वक करें।
  4. अपनी सुविधा के अनुसार 11, 21 या 108 बार पाठ कर सकते हैं; कोई संख्या अनिवार्य नहीं है।
  5. अंत में माँ से शुभ बुद्धि, साहस, करुणा और सबके कल्याण की प्रार्थना करें।

जप-विधि अलग-अलग परंपराओं में भिन्न हो सकती है। नियमितता और श्रद्धापूर्ण भाव मुख्य हैं।

07 / पाठ का समय

इस स्तुति का पाठ कब करें?

इस श्लोक का स्मरण प्रातःकाल, संध्याकाल, मंगलवार, शुक्रवार अथवा नवरात्रि के दौरान किया जा सकता है। पूजा के अतिरिक्त, दिन में कुछ क्षण शांत होकर देवी के नामों का स्मरण करना भी भक्ति की सरल विधि है।

08 / प्रश्नोत्तर

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यह मंत्र किस देवी का है?

यह माँ दुर्गा के अनेक स्वरूपों की वंदना है और अर्गला स्तोत्र में आता है।

क्या यह केवल नवरात्रि में पढ़ा जाता है?

नहीं। श्रद्धालु इसे नवरात्रि के अतिरिक्त अपनी नियमित देवी उपासना में भी पढ़ सकते हैं।

क्या बिना माला के पाठ कर सकते हैं?

हाँ। इस श्लोक का शांत मन से पाठ करने के लिए माला का होना आवश्यक नहीं है।

इसमें स्वाहा और स्वधा का क्या अर्थ है?

ये देवताओं और पितरों को अर्पण से जुड़ी वैदिक परंपरा की दिव्य संज्ञाएँ हैं।

क्या पाठ में “क्षमा शिवा” और “शिवा क्षमा” दोनों मिलते हैं?

हाँ। अलग-अलग प्रकाशित पाठों में इन दो नामों का क्रम भिन्न मिलता है; पाठ करते समय अपने प्रामाणिक पाठ या परंपरा के अनुसार चलें।

09 / अन्य मंत्र

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