भक्ति भावना की यह पुस्तक श्री हनुमान चालीसा के श्रद्धापूर्वक पाठ और सरल हिंदी अर्थ के अध्ययन के लिए प्रस्तुत है।
इस पुस्तक में
प्रारंभिक दोहे, चालीस चौपाइयाँ और समापन दोहा क्रम से दिए गए हैं। प्रत्येक पाठ के साथ उसका अर्थ रखा गया है, ताकि पढ़ते समय भाव समझना सहज हो।
पढ़ने का क्रम
पहले मूल पाठ पढ़ें, फिर उसके नीचे दिया अर्थ समझें। शांत मन से शब्दों और भाव पर ध्यान दें। पाठ को जल्दी समाप्त करने के बजाय श्रद्धा और एकाग्रता के साथ पढ़ें।
भक्ति भावना का निवेदन
हमारा प्रयास भक्ति और भारतीय संस्कृति को सरल हिंदी में जन-जन तक पहुँचाना है। इस प्रस्तुति में कोई त्रुटि दिखाई दे तो संबंधित पृष्ठ और पंक्ति के साथ अपना सुझाव दें।
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भक्ति भावना • सरल हिंदी अर्थ सहित
श्री हनुमान चालीसा
प्रारंभिक दोहा 1
श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।
बरनऊँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि॥
अर्थ: गुरु के चरण-कमलों की धूल से अपने मन रूपी दर्पण को शुद्ध करके,
मैं श्रीराम के निर्मल यश का वर्णन करता हूँ, जो धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष—चारों फलों को देने वाला है।
अर्थ: हे पवनपुत्र हनुमान जी! आप संकटों को दूर करने वाले और मंगलमय स्वरूप हैं।
श्रीराम, लक्ष्मण और माता सीता सहित मेरे हृदय में निवास कीजिए।
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भक्ति भावना • सरल हिंदी अर्थ सहित
स्रोत एवं समर्पण
मूल पाठ एवं अर्थ
इस पुस्तक का पाठ और सरल हिंदी अर्थ भक्ति भावना के प्रकाशित हनुमान चालीसा लेख से लिया गया है। मूल धार्मिक पाठ को इस डिजाइन परिवर्तन में बदला नहीं गया है।
अलग-अलग परंपराओं और संस्करणों में कुछ शब्दों के पाठभेद मिलते हैं। यहाँ संकलित स्रोत का पाठ रखा गया है। हिंदी अर्थ अध्ययन में सहायता के लिए दिया गया है।
संकलन एवं प्रस्तुति
बबलू प्रसाद द्विवेदी भक्ति भावना
समर्पण
यह विनम्र प्रस्तुति श्री सीताराम और उनके परम भक्त श्री हनुमान जी के चरणों में समर्पित है।
॥ श्री सीतारामचन्द्रार्पणमस्तु ॥
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भक्ति भावना • सरल हिंदी अर्थ सहित
प्रकाशन एवं संपर्क
पुस्तक की पहचान
श्री हनुमान चालीसा सरल हिंदी अर्थ सहित डिजिटल संस्करण • अक्टूबर 2026
भक्ति भावना
भक्ति, भारतीय संस्कृति और सरल हिंदी में अध्ययन की सेवा।
🚩 श्री राम भजन ओ मेरे रघुवर तू ही सहारा है प्रभु श्रीराम के प्रति प्रेम, विश्वास और पूर्ण समर्पण से भरा सुंदर भक्तिमय भजन। ▶ Instagram पर भजन देखें भजन लिरिक्स ॥ श्री राम ॥ ओ मेरे रघुवर तू ही सहारा है, मेरी नैय्यां का तू ही किनारा है।। ओ मेरे रघुवर तू ही सहारा है, मेरे रघुवर तू ही सहारा है।। मेरे ख्वाबों में तू, मेरी स्वासों में तू, मेरे दिल की धड़कन में, बस तू ही तू। मेरे ख्वाबों में तू, मेरी स्वासों में तू, मेरे दिल की धड़कन में, बस तू ही तू।। दीवाने तेरे प्यार में, बड़ा ही बुरा हाल, है पड़ा हूँ तेरे दर पे, ना होश ना ख्याल। मेरी नैय्यां का तू ही किनारा है, ओ मेरे रघुवर तू ही सहारा है, मेरे रघुवर तू ही सहारा है।। मेरी नैय्यां का तू ही किनारा है।। अंधेरों में जैसे उजाले हो तुम उजाले ही तुम, गिरतों को कितने सम्हाले हो तुम, सम्हाले ही तुम। तेरे बिना रघुवर मेरी, दुनियाँ वीरान है, तेरी किरपा से मेरी दुनियाँ में पहिचान है। मेरी नैय्यां का तू ही किनारा है, ओ मेरे रघुवर तू ही...
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