संदेश

सुंदरकांड लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

हनुमान जी अपनी शक्ति क्यों भूल गए? ऋषियों के शाप से जाम्बवान के स्मरण तक पूरी कथा

चित्र
भक्ति भावना • श्री हनुमान भक्ति ॥ जय श्री सीताराम ॥ हनुमान जी अपनी शक्ति क्यों भूल गए? बाल्यकाल के शाप से जाम्बवान के स्मरण और समुद्र लाँघने तक पूरी कथा जिन हनुमान जी का नाम साहस, बुद्धि और अतुलित बल का स्मरण कराता है, उन्हें अपने सामर्थ्य का स्मरण क्यों कराना पड़ा? क्या उनका बल समाप्त हो गया था? किसने शाप दिया और जाम्बवान के वचन सुनकर क्या हुआ? इस कथा को समझने के लिए पहले बाल हनुमान के प्रसंग में चलना होगा, फिर उस समुद्रतट पर जहाँ माता सीता की खोज में पहुँची वानर-सेना के सामने विशाल समुद्र की चुनौती खड़ी थी। कथा का आधार: बाल्यकाल के शाप का वृत्तांत वाल्मीकि रामायण के उत्तरकाण्ड में मिलता है। आगे का जाम्बवान–हनुमान संवाद यहाँ श्रीरामचरितमानस की चौपाइयों और उनके सरल भावार्थ के साथ समझाया गया है। 1. बाल हनुमान का सामर्थ्य और चंचलता उत्तरकाण्ड के वृत्तांत में देवताओं के वरदानों से संपन्न बाल हनुमान अत्यंत सामर्थ्यवान थे। बालसुलभ चंचलता में वे मुनियों के आश्रमों में पात्र, यज्ञ-सामग्री और वल्कल आदि बिखेर...

सुंदरकांड पाठ की विधि, नियम, सही समय और लाभ | Sundarkand Path Niyam

चित्र
🚩 श्री हनुमान भक्ति सुंदरकांड पाठ की विधि, नियम, सही समय और लाभ श्रीरामचरितमानस का परम प्रेरणादायी प्रसंग सुंदरकांड में श्री हनुमान जी की श्रीराम-भक्ति, साहस, बुद्धि, सेवा और अटूट विश्वास का अद्भुत वर्णन मिलता है। सुंदरकांड गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित श्रीरामचरितमानस का एक महत्वपूर्ण कांड है। इसमें श्री हनुमान जी का समुद्र लाँघना, लंका में प्रवेश, माता सीता की खोज, श्रीराम की मुद्रिका देना, अशोक वाटिका प्रसंग, लंका दहन और श्रीराम के पास वापस लौटने जैसे प्रसंग आते हैं। सुंदरकांड केवल पराक्रम की कथा नहीं है, बल्कि यह भक्ति, विश्वास, विवेक, साहस और प्रभु-सेवा का संदेश भी देता है। सुंदरकांड पाठ कैसे शुरू करें? पाठ शुरू करने से पहले मन को शांत करें और श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण जी तथा श्री हनुमान जी का श्रद्धापूर्वक स्मरण करें। विस्तृत कर्मकांड आवश्यक नहीं है; श्रद्धा और एकाग्रता सबसे महत्वपूर्ण हैं। सुंदरकांड प...

सुंदरकांड भाग 10: अशोक वाटिका, अच्छकुमार वध और मेघनाद से युद्ध | दोहा 18–20

॥ ✦ श्रीराम ✦ ॥ श्रीगोस्वामी तुलसीदास कृत श्रीरामचरितमानस — सुन्दरकाण्ड भाग 10 • अशोक वाटिका, अच्छकुमार वध एवं मेघनाद से युद्ध माता सीता की अनुमति प्राप्त करके श्रीहनुमान जी श्रीराम के चरणों को हृदय में धारण करते हुए अशोक वाटिका के फल खाने जाते हैं। लेकिन उनका उद्देश्य केवल भूख मिटाना नहीं था। लंका में श्रीरामदूत की उपस्थिति का प्रभाव अब प्रत्यक्ष रूप से दिखाई देने लगता है। वन के रक्षकों से संघर्ष होता है, रावण अनेक योद्धाओं को भेजता है, फिर उसका पुत्र अच्छकुमार आता है और उसके बाद अत्यंत बलवान मेघनाद स्वयं युद्ध के लिए पहुँचता है। ॥ अशोक वाटिका में श्रीहनुमान जी ॥ सुन्दरकाण्ड • दोहा 18 से दोहा 20 तक चौपाई चलेउ नाइ सिरु पैठेउ बागा। फल खाएसि तरु तोरैं लागा।। रहे तहाँ बहु भट रखवारे। कछु मारेसि कछु जाइ पुकारे।। सरल भावार्थ माता सीता को प्रणाम करके हनुमान जी वाटिका में प्रवेश कर गए। उन्होंने फल खाए और वृक्षों को उखाड़ना आरंभ किया। वहाँ अनेक बलवान राक्षस वाटिका की रक्षा कर रहे थे। हनुमान जी ने कुछ को परास्त कि...

सुंदरकांड भाग 5: लंका प्रवेश और विभीषण मिलन | दोहा 5–7 अर्थ सहित

॥ ✦ श्रीराम ✦ ॥ श्रीगोस्वामी तुलसीदास कृत श्रीरामचरितमानस — सुन्दरकाण्ड भाग 5 • लंका प्रवेश एवं विभीषण मिलन लंकिनी से लंका में प्रवेश की अनुमति मिलने के बाद श्रीहनुमान जी अत्यंत छोटे रूप में नगर के भीतर प्रवेश करते हैं। उनका एक ही उद्देश्य है—माता सीता का पता लगाना। वे महलों और भवनों में खोज करते हुए रावण के महल तक पहुँचते हैं, लेकिन वहाँ भी माता जानकी नहीं मिलतीं। तभी उन्हें एक ऐसा भवन दिखाई देता है जो पूरी राक्षसी लंका के बीच प्रभु-भक्ति की अलग ही पहचान लिए हुए है। ॥ लंका में प्रवेश ॥ सुन्दरकाण्ड • दोहा 5 से दोहा 7 तक चौपाई प्रबिसि नगर कीजे सब काजा। हृदयँ राखि कौसलपुर राजा।। गरल सुधा रिपु करहिं मिताई। गोपद सिंधु अनल सितलाई।। सरल भावार्थ लंका में प्रवेश करते हुए भाव यह है कि हृदय में अयोध्या के राजा श्रीराम को धारण करके सभी कार्य किए जाएँ। जिन पर श्रीराम की कृपा होती है, उनक...