हनुमान जी को सिंदूर क्यों चढ़ाया जाता है? | माता सीता और हनुमान जी की प्रसिद्ध कथा
हनुमान जी को सिंदूर क्यों चढ़ाया जाता है?
हनुमान मंदिरों में सिंदूर अर्पित करने की परंपरा अत्यंत प्रसिद्ध है। इसके पीछे श्रीराम के प्रति हनुमान जी की निष्काम भक्ति से जुड़ी एक लोकप्रिय धार्मिक कथा सुनाई जाती है।
हनुमान जी के शरीर पर सिंदूर लगाने से जुड़ी यह कथा लोकप्रिय भक्त-परंपरा और जनश्रुति में प्रसिद्ध है। इसे किसी एक रामायण के मूल प्रसंग के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा रहा है।
भगवान श्रीराम के परम भक्त श्री हनुमान जी की उपासना में सिंदूर का विशेष स्थान दिखाई देता है। अनेक हनुमान मंदिरों में भक्त हनुमान जी को सिंदूर अर्पित करते हैं।
इस परंपरा के पीछे एक अत्यंत भावपूर्ण कथा प्रचलित है, जो हनुमान जी की अपने प्रभु श्रीराम के प्रति निष्काम और अद्वितीय भक्ति को प्रकट करती है।
माता सीता को सिंदूर लगाते देखकर हनुमान जी ने क्या पूछा?
लोकप्रिय कथा के अनुसार एक दिन हनुमान जी ने माता सीता को अपनी माँग में सिंदूर लगाते हुए देखा।
हनुमान जी ने सरल भाव से माता सीता से पूछा कि वे अपनी माँग में सिंदूर क्यों लगाती हैं।
कथा में बताया जाता है कि माता सीता ने उन्हें समझाया कि यह उनके पति भगवान श्रीराम के मंगल और दीर्घायु की कामना से जुड़ा सौभाग्य-चिह्न है।
हनुमान जी ने पूरे शरीर पर सिंदूर क्यों लगा लिया?
माता सीता की बात सुनकर हनुमान जी के मन में एक अद्भुत भाव उत्पन्न हुआ।
उन्होंने सोचा कि यदि थोड़ा-सा सिंदूर लगाने से प्रभु श्रीराम का मंगल होता है, तो वे अपने प्रिय प्रभु के कल्याण के लिए पूरे शरीर पर सिंदूर क्यों न लगा लें?
अपनी निष्काम भक्ति और सरलता से प्रेरित होकर हनुमान जी ने अपने पूरे शरीर पर सिंदूर लगा लिया। यही प्रसंग भक्तों के बीच अत्यंत प्रसिद्ध है। 1
हनुमान जी अपने लिए कुछ नहीं चाहते। उनका प्रत्येक विचार और प्रत्येक कार्य श्रीराम की सेवा से जुड़ा है। यही कारण है कि यह कथा निष्काम प्रेम और परम भक्ति का सुंदर प्रतीक मानी जाती है।
श्रीराम ने हनुमान जी को सिंदूर में देखकर क्या किया?
लोकप्रिय कथा के अनुसार जब भगवान श्रीराम ने हनुमान जी को पूरे शरीर पर सिंदूर लगाए देखा, तो उन्होंने इसका कारण पूछा।
हनुमान जी ने बताया कि उन्होंने यह सब प्रभु के मंगल के लिए किया है। श्रीराम हनुमान जी की निष्कपट भक्ति से अत्यंत प्रसन्न हुए।
इसी भक्तिमय प्रसंग के साथ हनुमान जी को सिंदूर अर्पित करने की प्रचलित परंपरा को जोड़ा जाता है।
हनुमान जी को सिंदूर चढ़ाने की परंपरा
आज अनेक हनुमान मंदिरों में भक्त श्रद्धापूर्वक सिंदूर अर्पित करते हैं। विशेष रूप से मंगलवार और शनिवार को हनुमान उपासना का व्यापक प्रचलन है। हनुमान जयंती की पूजा परंपराओं में भी सिंदूर अर्पण का उल्लेख मिलता है। 2
अलग-अलग क्षेत्रों और मंदिरों में पूजा की विधि भिन्न हो सकती है, इसलिए किसी विशेष मंदिर में वहाँ की परंपरा का सम्मान करना उचित है।
सिंदूर कथा हमें क्या सिखाती है?
सच्ची भक्ति में भक्त अपने स्वार्थ से अधिक अपने आराध्य के मंगल को महत्व देता है।
हनुमान जी का जीवन श्रीराम की सेवा और आज्ञापालन का आदर्श प्रस्तुत करता है।
हनुमान जी की महानता के साथ उनकी सरलता और निष्कपटता भी इस कथा में दिखाई देती है।
हनुमान जी के लिए श्रीराम की सेवा ही सर्वोच्च साधना है।
क्या हनुमान जी को सिंदूर चढ़ाना अनिवार्य है?
नहीं। हनुमान भक्ति केवल किसी एक पूजा-सामग्री पर निर्भर नहीं है। नाम-स्मरण, हनुमान चालीसा, सुंदरकांड, श्रीराम नाम और श्रद्धापूर्वक प्रार्थना भी हनुमान उपासना के प्रमुख रूप हैं।
सिंदूर अर्पण एक प्रचलित भक्तिपरक परंपरा है। भक्ति में सबसे महत्वपूर्ण तत्व श्रद्धा, मर्यादा और निष्कपट भाव है।
श्री हनुमान जी की अन्य भक्ति सामग्री
नोट: सिंदूर से जुड़ी यह कथा लोकप्रिय धार्मिक परंपरा और भक्त-जनश्रुति में प्रचलित है। विभिन्न क्षेत्रों में इसके वर्णन में छोटे अंतर मिल सकते हैं।
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