श्री काली चालीसा हिंदी अर्थ सहित | Kali Chalisa

🌺 श्री काली चालीसा

श्री काली चालीसा आदिशक्ति माँ काली के दिव्य स्वरूप, विभिन्न शक्तिरूपों, भक्तों पर उनकी कृपा और अधर्म के नाश की महिमा का स्तवन है। नीचे प्रचलित श्री काली चालीसा सरल हिंदी भावार्थ सहित प्रस्तुत है।

॥ दोहा ॥
जय काली जगदम्ब जय, हरनि ओघ अघ पुंज।
वास करहु निज दास के, निशदिन हृदय निकुंज॥

जयति कपाली कालिका, कंकाली सुख दानि।
कृपा करहु वरदायिनी, निज सेवक अनुमानि॥

अर्थ: हे जगदम्बा काली! आपकी जय हो। भक्त प्रार्थना करता है कि माता उसके हृदय में निवास करें, दोषों से दूर रखें और अपनी कृपा प्रदान करें।

जय जय जय काली कंकाली।
जय कपालिनी, जयति कराली॥

अर्थ: माँ काली के अनेक शक्तिशाली स्वरूपों की बारंबार जय बोली गई है।

शंकर प्रिया, अपर्णा, अम्बा।
जय कपर्दिनी, जय जगदम्बा॥

अर्थ: भगवान शिव की प्रिय, अपर्णा और जगदम्बा रूपी माता को प्रणाम किया गया है।

आर्या, हला, अम्बिका, माया।
कात्यायनी उमा जगजाया॥

अर्थ: आर्या, अम्बिका, कात्यायनी और उमा आदि नामों से उसी देवी शक्ति का स्मरण किया गया है।

गिरिजा गौरी दुर्गा चण्डी।
दाक्षायणी शाम्भवी प्रचण्डी॥

अर्थ: गिरिजा, गौरी, दुर्गा, चण्डी और शाम्भवी—ये देवी के विविध दिव्य नाम हैं।

पार्वती मंगला भवानी।
विश्वकारिणी सती मृडानी॥

अर्थ: माता को पार्वती, मंगला, भवानी और समस्त जगत की कल्याणकारी शक्ति के रूप में प्रणाम किया गया है।

सर्वमंगला शैल नन्दिनी।
हेमवती तुम जगत वन्दिनी॥

अर्थ: पर्वतराज की पुत्री माता को संसार द्वारा पूजित और सर्वमंगलकारी कहा गया है।

ब्रह्मचारिणी कालरात्रि जय।
महारात्रि जय मोहरात्रि जय॥

अर्थ: ब्रह्मचारिणी और कालरात्रि सहित देवी के विभिन्न शक्तिरूपों की जय बोली गई है।

तुम त्रिमूर्ति रोहिणी कालिका।
कूष्माण्डा कार्तिका चण्डिका॥

अर्थ: माता को त्रिमूर्ति की शक्ति तथा कालिका, कूष्माण्डा और चण्डिका रूप में स्मरण किया गया है।

तारा भुवनेश्वरी अनन्या।
तुम्हीं छिन्नमस्ता शुचिधन्या॥

अर्थ: तारा, भुवनेश्वरी और छिन्नमस्ता सहित महाविद्याओं को देवी की ही शक्तियाँ माना गया है।

धूमावती षोडशी माता।
बगला मातंगी विख्याता॥

अर्थ: धूमावती, षोडशी, बगलामुखी और मातंगी के रूप में भी उसी आदिशक्ति का स्मरण किया गया है।

तुम भैरवी मातु तुम कमला।
रक्तदन्तिका कीरति अमला॥

अर्थ: भैरवी, कमला और रक्तदन्तिका जैसे देवी स्वरूपों की पवित्र महिमा का गुणगान किया गया है।

शाकम्भरी कौशिकी भीमा।
महात्मा अग जग की सीमा॥

अर्थ: शाकम्भरी, कौशिकी और भीमा आदि रूपों में देवी की व्यापक शक्ति का स्मरण है।

चन्द्रघण्टिका तुम सावित्री।
ब्रह्मवादिनी माँ गायत्री॥

अर्थ: चन्द्रघण्टा, सावित्री और गायत्री जैसे ज्ञानमय स्वरूपों को भी देवी शक्ति का रूप बताया गया है।

रुद्राणी तुम कृष्ण पिंगला।
अग्निज्वाला तुम सर्वमंगला॥

अर्थ: रुद्राणी और सर्वमंगला रूप में माता की तेजस्वी और कल्याणकारी शक्ति की स्तुति है।

मेघस्वना तपस्विनि योगिनी।
सहस्राक्षि तुम अगजग भोगिनी॥

अर्थ: माता को तपस्या, योग और समस्त जगत में व्याप्त दिव्य शक्ति के रूप में प्रणाम किया गया है।

जलोदरी सरस्वती डाकिनी।
त्रिदशेश्वरी अजेय लाकिनी॥

अर्थ: देवी के विभिन्न पारंपरिक नामों और शक्तिरूपों का यहाँ स्मरण किया गया है।

पुष्टि तुष्टि धृति स्मृति शिव दूती।
कामाक्षी लज्जा आहूती॥

अर्थ: पुष्टि, संतोष, धैर्य, स्मृति और कामाक्षी जैसे शुभ गुणों को देवी शक्ति से जोड़ा गया है।

महोदरी कामाक्षि हारिणी।
विनायकी श्रुति महाशाकिनी॥

अर्थ: माता के अनेक दिव्य नामों का स्मरण करते हुए उनकी अनंत शक्ति को प्रणाम किया गया है।

अजा कर्ममोही ब्रह्माणी।
धात्री वाराही शर्वाणी॥

अर्थ: ब्रह्माणी, वाराही और शर्वाणी सहित विभिन्न मातृशक्तियों की स्तुति की गई है।

स्कन्द मातु तुम सिंह वाहिनी।
मातु सुभद्रा रहहु दाहिनी॥

अर्थ: माता को स्कन्दमाता और सिंहवाहिनी के रूप में स्मरण कर उनकी कृपा की प्रार्थना की गई है।

नाम रूप गुण अमित तुम्हारे।
शेष शारदा बरणत हारे॥

अर्थ: माता के अनंत नाम, रूप और गुणों का पूर्ण वर्णन करना संभव नहीं है।

तनु छवि श्यामवर्ण तव माता।
नाम कालिका जग विख्याता॥

अर्थ: माता के श्यामवर्ण दिव्य रूप को कालिका नाम से संसार में प्रसिद्ध बताया गया है।

अष्टादश तव भुजा मनोहर।
तिनमहँ अस्त्र विराजत सुन्दर॥

अर्थ: देवी के बहुभुजा स्वरूप में विभिन्न दिव्य आयुध धर्म की रक्षा और शक्ति के प्रतीक हैं।

शंख चक्र अरु गदा सुहावन।
परिघ भुशुण्डी घण्टा पावन॥

अर्थ: देवी के हाथों में सुशोभित आयुधों को शक्ति, धर्मरक्षा और दिव्य सामर्थ्य का प्रतीक माना गया है।

शूल वज्र धनुबाण उठाए।
निशिचर कुल सब मारि गिराए॥

अर्थ: माता के शक्तिशाली स्वरूप को अधर्म और दुष्ट प्रवृत्तियों के नाश का प्रतीक बताया गया है।

शुम्भ निशुम्भ दैत्य संहारे।
रक्तबीज के प्राण निकारे॥

अर्थ: शुम्भ, निशुम्भ और रक्तबीज पर विजय की कथा धर्म की अधर्म पर विजय का प्रतीक है।

चौंसठ योगिनी नाचत संगा।
जय जयकार गूँजत रण अंगा॥

अर्थ: देवी की विजय के अवसर पर उनकी योगिनी शक्तियों के साथ दिव्य उत्सव का भाव व्यक्त किया गया है।

कटि किंकिणी मधुर नूपुर धुनि।
दैत्यवंश कांपत जेहि सुनि-सुनि॥

अर्थ: माता के आगमन और दिव्य शक्ति के प्रभाव से अधर्म के भयभीत होने का काव्यात्मक वर्णन है।

कर खप्पर त्रिशूल भयकारी।
अहै सदा सन्तन सुखकारी॥

अर्थ: माता का उग्र स्वरूप अधर्म के लिए कठोर, जबकि संतों और भक्तों के लिए कल्याणकारी बताया गया है।

शिव संग दिव्य नृत्य तुम साजा।
बजत मृदंग भेरी के बाजा॥

अर्थ: माता के दिव्य नृत्य और शिवतत्व के साथ उनके गहरे आध्यात्मिक संबंध का भाव प्रस्तुत किया गया है।

अरिदल पर विजय तुम कीन्हा।
धर्ममार्ग भक्तन को दीन्हा॥

अर्थ: देवी की विजय को अधर्म के अंत और भक्तों के लिए धर्ममार्ग की स्थापना का प्रतीक माना गया है।

लपलपाति जिव्हा तव माता।
भक्तन सुख दुष्टन दुःख दाता॥

अर्थ: माता के उग्र स्वरूप को भक्तों के लिए रक्षक और अधर्म के लिए कठोर बताया गया है।

लसत भाल सेंदुर को टीको।
बिखरे केश रूप अति नीको॥

अर्थ: माता के मस्तक पर सिंदूर और खुले केश उनके विशिष्ट दिव्य स्वरूप की शोभा बढ़ाते हैं।

मुण्डमाल गल अतिशय सोहत।
भुजामल किंकण मनमोहन॥

अर्थ: माता के पारंपरिक प्रतीकात्मक आभूषण अहंकार और अज्ञान पर विजय के गहरे आध्यात्मिक भाव से जुड़े माने जाते हैं।

प्रलय नृत्य तुम करहु भवानी।
जगदम्बा कहि वेद बखानी॥

अर्थ: माता के प्रलयकारी स्वरूप को सृष्टि के परिवर्तन और पुनर्निर्माण की शक्ति का प्रतीक माना गया है।

तुम श्मशान वासिनी कराला।
भजत तुरत काटहु भवजाला॥

अर्थ: काली माता का स्वरूप जीवन की नश्वरता का स्मरण कराता है और भक्त सांसारिक मोह से मुक्ति की प्रार्थना करता है।

बावन शक्ति पीठ तव सुन्दर।
जहाँ बिराजत विविध रूप धर॥

अर्थ: देवी के विभिन्न रूप अनेक शक्ति-पीठों में पूजित माने जाते हैं।

विन्धवासिनी कहूँ बड़ाई।
कहँ कालिका रूप सुहाई॥

अर्थ: विंध्यवासिनी और कालिका सहित माता के विभिन्न क्षेत्रीय और दिव्य स्वरूपों की स्तुति है।

शाकम्भरी बनी कहँ ज्वाला।
महिषासुर मर्दिनी कराला॥

अर्थ: शाकम्भरी, ज्वाला और महिषासुरमर्दिनी रूपों में माता की कल्याणकारी और धर्मरक्षक शक्ति का स्मरण है।

कामाख्या तव नाम मनोहर।
पूजवहिं भक्त भाव धरि अन्तर॥

अर्थ: कामाख्या स्वरूप में भी माता को श्रद्धा और भक्ति से पूजा जाता है।

चण्ड मुण्ड वध छिन महँ करेउ।
देवन के उर आनन्द भरेउ॥

अर्थ: चण्ड-मुण्ड पर विजय का प्रसंग देवताओं और भक्तों के लिए धर्म की विजय का प्रतीक है।

सर्व व्यापिनी तुम माँ तारा।
अरिदल दलन लेहु अवतारा॥

अर्थ: माता को सर्वव्यापी शक्ति मानकर अधर्म का अंत करने वाली देवी के रूप में प्रणाम किया गया है।

खलबल मचत सुनत हुँकारी।
अगजग व्यापक देह तुम्हारी॥

अर्थ: माता की शक्ति का प्रभाव समस्त चर-अचर जगत में व्याप्त बताया गया है।

तुम विराट रूपा गुणखानी।
विश्व स्वरूपा तुम महारानी॥

अर्थ: माता को विराट विश्वरूप और अनंत गुणों की अधिष्ठात्री महारानी कहा गया है।

उत्पत्ति स्थिति लय तुम्हरे कारण।
करहु दास के दोष निवारण॥

अर्थ: देवी को सृष्टि की उत्पत्ति, पालन और परिवर्तन की मूल शक्ति मानकर भक्त अपने दोषों को दूर करने की प्रार्थना करता है।

माँ उर वास करहु तुम अम्बा।
सदा दीन जन की अवलम्बा॥

अर्थ: भक्त माँ से अपने हृदय में निवास करने और जीवनभर आश्रय देने की प्रार्थना करता है।

तुम्हारो ध्यान धरै जो कोई।
ता कहँ भीति कतहुँ नहिं होई॥

अर्थ: माता का ध्यान भक्त के भीतर साहस, विश्वास और निर्भयता का भाव उत्पन्न करता है।

विश्वरूप तुम आदि भवानी।
महिमा वेद पुराण बखानी॥

अर्थ: आदि भवानी की महिमा का वर्णन धार्मिक ग्रंथों और परंपराओं में किया गया है।

अति अपार तव नाम प्रभावा।
जपत मिटै मन दुःख संतापा॥

अर्थ: माता के नाम-स्मरण को भक्त मन की शांति और आध्यात्मिक सहारे से जोड़ता है।

महाकालिका जय कल्याणी।
जयति सदा सेवक सुखदानी॥

अर्थ: महाकालिका और कल्याणी माता की जय हो। भक्त उनके चरणों में कल्याण की कामना रखता है।

तुम अनन्त औदार्य विभूषण।
कीजिए कृपा क्षमिये सब दूषण॥

अर्थ: हे दयामयी माता! अपनी कृपा कीजिए और भक्त की भूलों तथा दोषों को क्षमा कीजिए।

दास जानि निज दया दिखावहु।
सुत अनुमानि सहित अपनावहु॥

अर्थ: भक्त माता से निवेदन करता है कि उसे अपना सेवक और संतान समझकर स्वीकार करें।

जननी तुम सेवक प्रतिपाली।
करहु कृपा सब विधि माँ काली॥

अर्थ: भक्त माँ काली से जीवन के हर क्षेत्र में कृपा और मार्गदर्शन की प्रार्थना करता है।

पाठ करै चालीसा जोई।
ता पर कृपा तुम्हारी होई॥

अर्थ: समापन में श्रद्धा से काली चालीसा का पाठ करने वाले भक्त के कल्याण और माता की कृपा की कामना की गई है।

🌼 भक्ति भावना

माँ काली का स्वरूप केवल उग्रता का प्रतीक नहीं है। भक्ति परंपरा में वे भय, अहंकार, अज्ञान और अधर्म पर विजय दिलाने वाली मातृशक्ति के रूप में पूजित हैं। पाठ श्रद्धा, संयम और निर्मल भाव से करें।

जय माँ काली 🌺
जय आदिशक्ति जगदम्बा 🙏
भक्ति भावना • भक्ति • धर्म • भारतीय संस्कृति

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