तन तर ना सकेगा मूर्ख प्राणी राम के बिना | श्री राम भजन

🚩 श्री राम भजन

तन तर ना सकेगा मूर्ख प्राणी राम के बिना

श्रीराम नाम और हरि-भक्ति की महिमा बताने वाला सुंदर भक्तिमय भजन।

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भजन लिरिक्स

॥ जय श्री राम ॥ तन तर ना सकेगा मूर्ख प्राणी, राम के बिना। सुख पा ना सकेगा जीवन भर, सुख धाम के बिना।
तन तर ना सकेगा मूर्ख प्राणी, राम के बिना।

बिन पानी के नाव चले ना, घी बिन दीप जले।
नारी सुहागन नहीं लगे, जब तक ना माँग भरे।
नीलकंठ कोई हो ना सका, विषपान के बिना।
सुख पा ना सकेगा जीवन भर, सुख धाम के बिना।

चंदन बिना ललाट ना सोहे, योगी ज्ञान बिना।
जो धनवान न शोभित हो पाता, दान बिना।
तीरथ व्रत बेकार सभी, हरि नाम के बिना।
सुख पा ना सकेगा जीवन भर, सुख धाम के बिना।

तन तर ना सकेगा मूर्ख प्राणी, राम के बिना।
🌸 जय श्रीराम! 🌸

संक्षिप्त भावार्थ:
बिना राम-नाम और प्रभु-आश्रय के जीवन-नौका पार नहीं लगती। जैसे नाव को पानी, दीप को घी, सुहाग को सिन्दूर, योगी को ज्ञान और धन को दान चाहिए—वैसे ही जीव को हरि-नाम चाहिए। व्रत-तीर्थ भी नाम-स्मरण के बिना निष्फल हैं; सच्चा सुख केवल सुखधाम श्रीराम की शरण में है। 🎵 पूरा भजन सुनने के लिए यहाँ क्लिक करें

भजन का भाव

इस भजन का संदेश है कि जीवन में बाहरी साधनों के साथ प्रभु का स्मरण और आध्यात्मिक आधार भी आवश्यक है। जिस प्रकार विभिन्न वस्तुओं की अपनी आवश्यकता और उपयोगिता होती है, उसी प्रकार भक्त के जीवन में हरि-नाम और प्रभु श्रीराम का स्मरण मन को शांति, विश्वास और भक्ति प्रदान करता है।
🙏 भक्ति संदेश: श्रीराम नाम का स्मरण करते हुए जीवन में अच्छे कर्म, सेवा, दया और विनम्रता को अपनाना ही सच्ची भक्ति का मार्ग है।

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