माँ स्कंदमाता पूजा विधि, मंत्र, भोग, कथा एवं दिव्य स्वरूप | शारदीय नवरात्रि 2026

भक्ति भावना प्रस्तुत • शारदीय नवरात्रि 2026

माँ स्कंदमाता पूजा विधि, मंत्र, कथा और भोग

नवरात्रि के पाँचवें दिन पूजित माँ स्कंदमाता को भगवान स्कंद (कार्तिकेय) की माता के रूप में स्मरण किया जाता है। इस सचित्र संग्रह में जानें उनका दिव्य स्वरूप, नाम का अर्थ, पौराणिक प्रसंग, सरल पूजा-विधि, मंत्र और पारंपरिक भोग।

पंचम दिवसमंत्र व भोग7 चुने हुए चित्र
इस संग्रह के बारे में: ये चित्र भक्ति भावना की माँ स्कंदमाता कैरोसेल श्रृंखला से चुनकर व्यवस्थित किए गए हैं। चित्रों के साथ मूल बातों का स्पष्ट हिंदी विवरण दिया गया है, ताकि उन्हें मोबाइल पर भी सरलता से पढ़ा जा सके।
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नवरात्रि का पाँचवाँ स्वरूप — माँ स्कंदमाता

माँ स्कंदमाता का दिव्य कवर चित्र, बाल कार्तिकेय, कमल आसन और सिंह वाहन
चित्र 01 — पंचम दिवस के माँ स्कंदमाता के दिव्य स्वरूप का आकर्षक चित्र। © Bhakti Bhavna

नवदुर्गा के पाँचवें स्वरूप को माँ स्कंदमाता कहा जाता है। उनकी छवि में वात्सल्य और शौर्य का अनूठा समन्वय दिखाई देता है। माँ की गोद में बाल स्कंद, हाथों में कमल और समीप सिंह वाहन का चित्र भक्त के मन में करुणा तथा संरक्षण का भाव जगाता है।

मुख्य भाव: मातृत्व, ममता, करुणा और कल्याण।
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कौन हैं माँ स्कंदमाता?

माँ स्कंदमाता नवदुर्गा का पाँचवाँ स्वरूप, गोद में बाल स्कंद और सिंह वाहन
चित्र 02 — माँ स्कंदमाता की पहचान एवं मातृत्व का दिव्य स्वरूप। © Bhakti Bhavna

माँ स्कंदमाता भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र स्कंद अर्थात कार्तिकेय की माता का स्वरूप हैं। स्कंद देवताओं के सेनापति के रूप में भी प्रसिद्ध हैं। माँ स्कंदमाता का स्वरूप भक्तों को ममतामयी शक्ति की याद दिलाता है।

पारंपरिक चित्रण में माता की चार भुजाएँ होती हैं। दो हाथों में कमल, एक में बाल स्कंद और एक हाथ में आशीर्वाद मुद्रा दिखाई जाती है। माता को कमल आसन और सिंह वाहन से भी जोड़ा जाता है।

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स्कंदमाता नाम का अर्थ क्या है?

स्कंद अर्थात कार्तिकेय और माता अर्थात जननी, माँ स्कंदमाता नाम का अर्थ
चित्र 03 — स्कंदमाता नाम की व्युत्पत्ति और देवी का मातृस्वरूप। © Bhakti Bhavna

स्कंद भगवान कार्तिकेय का नाम है और माता का अर्थ जननी है। इस प्रकार स्कंदमाता का सीधा अर्थ हुआ — स्कंद की माता। यह नाम दिव्य मातृत्व की सहज पहचान है।

इस रूप में माता का वात्सल्य केवल पुत्र के लिए प्रेम नहीं, बल्कि भक्त के लिए करुणा और संरक्षण का प्रतीक भी माना जाता है।

याद रखें: स्कंद = कार्तिकेय; स्कंदमाता = भगवान स्कंद की माता।
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माँ स्कंदमाता की पौराणिक कथा

माँ स्कंदमाता, कार्तिकेय और तारकासुर से संबंधित पौराणिक प्रसंग का चित्र
चित्र 04 — शिव-पार्वती पुत्र कार्तिकेय तथा तारकासुर की कथा से जुड़ा चित्र। © Bhakti Bhavna

प्रचलित पौराणिक कथाओं में तारकासुर के अत्याचार से देवताओं के व्याकुल होने का वर्णन मिलता है। भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र स्कंद (कार्तिकेय) ने देवसेना का नेतृत्व किया और तारकासुर का वध किया।

यही वीर बालक स्कंद माँ पार्वती के पुत्र हैं, इसलिए माता के इस रूप को स्कंदमाता कहा जाता है। यह प्रसंग मातृशक्ति, साहस और धर्म की रक्षा के भाव से जुड़ा है। विभिन्न पुराणों एवं लोकपरंपराओं में विवरणों में अंतर मिल सकता है।

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माँ स्कंदमाता की सरल पूजा विधि

माँ स्कंदमाता की पूजा विधि, दीप, पुष्प, फल, मंत्रजप, आरती और प्रार्थना
चित्र 05 — नवरात्रि के पंचम दिन माँ स्कंदमाता की सरल पूजा का चित्र। © Bhakti Bhavna

माँ की उपासना अपने घर की परंपरा और सुविधा के अनुसार श्रद्धा से की जा सकती है। सामान्य घरेलू पूजा का एक सरल क्रम इस प्रकार है:

  1. पूजा-स्थान स्वच्छ करें: शांत मन से माता का स्मरण करें।
  2. दीप प्रज्वलित करें: दीप सुरक्षित स्थान पर रखें और उसकी देखरेख करें।
  3. पुष्प एवं फल अर्पित करें: उपलब्धता के अनुसार स्वच्छ पुष्प और फल चढ़ाएँ।
  4. मंत्र का जप करें: देवी के नाम मंत्र का श्रद्धापूर्वक स्मरण करें।
  5. आरती और प्रार्थना करें: अपने परिवार एवं समस्त जीवों के कल्याण की कामना करें।
पूजा की सामग्री और विधि क्षेत्रीय तथा पारिवारिक परंपराओं के अनुसार भिन्न हो सकती है; भक्ति भाव मूल है।
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माँ स्कंदमाता का मंत्र एवं पारंपरिक भोग

ॐ देवी स्कन्दमात्रे नमः मंत्र और माँ स्कंदमाता के लिए केले का पारंपरिक भोग
चित्र 06 — माँ स्कंदमाता का नाम मंत्र एवं केले का पारंपरिक भोग। © Bhakti Bhavna

माँ स्कंदमाता का नाम मंत्र

ॐ देवी स्कन्दमात्रे नमः॥

मंत्र के उच्चारण और लेखन में मूल अक्षरों का ध्यान रखें। श्रद्धा और एकाग्रता के साथ सरल नाम स्मरण भी किया जा सकता है।

पारंपरिक भोग — केला

माँ स्कंदमाता की पूजा में केले का भोग अर्पित करने की प्रथा प्रचलित है। भोग को स्वच्छ पात्र में अर्पित करें। उपलब्ध फल, पुष्प और शुद्ध भाव से भी पूजा की जा सकती है।

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माँ स्कंदमाता का आशीर्वाद और प्रार्थना

माँ स्कंदमाता का आशीर्वाद, मातृप्रेम, करुणा और मंगल कामना
चित्र 07 — माँ स्कंदमाता के दिव्य आशीर्वाद का भावपूर्ण समापन चित्र। © Bhakti Bhavna

माँ स्कंदमाता का ममतामयी स्वरूप भक्त को प्रेम, करुणा और सहृदयता का स्मरण कराता है। नवरात्रि में उनकी आराधना करते हुए परिवार और समाज में शांति, सद्भाव तथा मंगल की कामना की जाती है।

माँ स्कंदमाता की कृपा से हर घर में प्रेम, शांति और मंगल बना रहे।
जय माँ स्कंदमाता! 🙏

भक्ति भावना का प्रयास है कि प्रामाणिक श्रद्धाभाव के साथ सनातन भक्ति सामग्री पाठकों तक सरल हिंदी में पहुँचे। इस सचित्र संग्रह को अपने परिवार और मित्रों के साथ साझा करें।

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माँ स्कंदमाता — सामान्य प्रश्न और उत्तर

माँ स्कंदमाता नवदुर्गा का कौन-सा स्वरूप हैं?

माँ स्कंदमाता नवदुर्गा का पाँचवाँ स्वरूप मानी जाती हैं।

स्कंदमाता नाम का क्या अर्थ है?

स्कंद अर्थात भगवान कार्तिकेय और माता अर्थात जननी; इसलिए स्कंदमाता का अर्थ स्कंद की माता है।

माँ स्कंदमाता का वाहन और आसन क्या है?

पारंपरिक रूप में सिंह उनका वाहन तथा कमल उनका आसन बताया जाता है।

माँ स्कंदमाता का नाम मंत्र क्या है?

ॐ देवी स्कन्दमात्रे नमः॥

माँ स्कंदमाता को क्या भोग चढ़ाते हैं?

केले का भोग अर्पित करने की परंपरा प्रचलित है।

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