श्रीरामचरितमानस बालकाण्ड भाग 62 | जनकपुर की मंगलकामना और विवाह का शुभ मुहूर्त | दोहा 309–313 अर्थ सहित
श्रीरामचरितमानस
बालकाण्ड — भाग ६२
चारों भाइयों की अनुपम शोभा, जनकपुर की मंगलकामना और श्रीसीताराम विवाह की शुभ बेला
गोस्वामी तुलसीदासजी कृत श्रीरामचरितमानस का बालकाण्ड भाग ६२, पिछली कड़ी के दोहा ३०८ के तुरंत बाद से शुरू होता है। यहाँ जनकपुरवासियों का उत्साह, चारों भाइयों की मनोहर शोभा, विवाह के लिए मंगलकामना और गोधूलि बेला का पवित्र प्रसंग आता है।
चारों भाइयों के दर्शन से जनकपुर का आनंद
श्रीराम की छवि • दशरथजी के चार पुत्र • नगरवासियों का हर्ष
जानकी और श्रीराम के सौभाग्य पर जनकपुर का उल्लास
जानकीजी का पुण्य • नगरवासियों का सौभाग्य • विवाह-दर्शन की अभिलाषा
चारों भाइयों के विवाह की मंगलकामना
भरत–शत्रुघ्न का रूप • नगर-स्त्रियों की प्रार्थना • विशेष छंद
विवाह का शुभ मुहूर्त और गोधूलि बेला
विवाह की प्रतीक्षा • अगहन मास • मंगल लग्न का समाचार
शंखनाद के साथ बारात का विवाह-मंडप की ओर प्रस्थान
पुरोहित शतानंद • मंगलगीत • कुलरीति • दशरथजी की बारात

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