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अवधूत गीता अध्याय 8: अवधूत के लक्षण — 10 श्लोक हिंदी भावार्थ सहित

भक्ति भावना • अवधूत गीता अवधूत गीता अध्याय ८ • अवधूत के लक्षण सम्पूर्ण १० श्लोक • मूल संस्कृत पाठ एवं सरल हिंदी भावार्थ ☰ ग्रंथालय में अवधूत गीता अवधूत गीता परंपरा में भगवान दत्तात्रेय से संबद्ध अद्वैत ग्रंथ है। इस अध्याय का विषय है—अवधूत के लक्षण। नीचे अध्याय के सभी १० श्लोक मूल संस्कृत पाठ और सरल हिंदी भावार्थ के साथ क्रम से दिए गए हैं। पाठ और भावार्थ का संदर्भ: यहाँ आठ अध्यायों वाला २७१-श्लोक पाठ अपनाया गया है। विभिन्न संस्करणों में पाठ और श्लोक-संख्या में अंतर मिलता है। संस्कृत पाठ का मिलान संस्कृत डॉक्यूमेंट्स संग्रह से किया गया है। हिंदी भावार्थ भक्ति भावना द्वारा सरल भाषा में प्रस्तुत है; विषय-शीर्षक पढ़ने की सुविधा के लिए हैं। अद्वैत में अकर्तापन और भेदों के निषेध के कथन शुद्ध आत्मा की दृष्टि से हैं। व्यवहार में कर्तव्य, सदाचार, गुरु के प्रति सम्मान और करुणा का महत्त्व बना रहता है। अध्याय ८ • श्लोक १ त्वद्यात्रया व्यापकता हता ते ध्यानेन चेतःपरता हता ते । स्तुत्या मया वाक्परता हता ते क्षमस्व नित्यं त्रिविधापराधान् ॥ १॥ सरल हिंदी भावार्थ: प्रभो! आपको किसी एक स्थान पर पाने के ल...

अवधूत गीता अध्याय 7: अवधूत की सहज अवस्था — 15 श्लोक हिंदी भावार्थ सहित

भक्ति भावना • अवधूत गीता अवधूत गीता अध्याय ७ • अवधूत की सहज अवस्था सम्पूर्ण १५ श्लोक • मूल संस्कृत पाठ एवं सरल हिंदी भावार्थ ☰ ग्रंथालय में अवधूत गीता अवधूत गीता परंपरा में भगवान दत्तात्रेय से संबद्ध अद्वैत ग्रंथ है। इस अध्याय का विषय है—अवधूत की सहज अवस्था। नीचे अध्याय के सभी १५ श्लोक मूल संस्कृत पाठ और सरल हिंदी भावार्थ के साथ क्रम से दिए गए हैं। पाठ और भावार्थ का संदर्भ: यहाँ आठ अध्यायों वाला २७१-श्लोक पाठ अपनाया गया है। विभिन्न संस्करणों में पाठ और श्लोक-संख्या में अंतर मिलता है। संस्कृत पाठ का मिलान संस्कृत डॉक्यूमेंट्स संग्रह से किया गया है। हिंदी भावार्थ भक्ति भावना द्वारा सरल भाषा में प्रस्तुत है; विषय-शीर्षक पढ़ने की सुविधा के लिए हैं। अद्वैत में अकर्तापन और भेदों के निषेध के कथन शुद्ध आत्मा की दृष्टि से हैं। व्यवहार में कर्तव्य, सदाचार, गुरु के प्रति सम्मान और करुणा का महत्त्व बना रहता है। अध्याय ७ • श्लोक १ रथ्याकर्पटविरचितकन्थः पुण्यापुण्यविवर्जितपन्थः । शून्यागारे तिष्ठति नग्नो शुद्धनिरञ्जनसमरसमग्नः ॥ १॥ सरल हिंदी भावार्थ: अवधूत सड़क से मिले कपड़ों की कंथा धारण कर सकता ...

अवधूत गीता अध्याय 6: अखंड शिवतत्त्व — 27 श्लोक हिंदी भावार्थ सहित

भक्ति भावना • अवधूत गीता अवधूत गीता अध्याय ६ • अखंड शिवतत्त्व सम्पूर्ण २७ श्लोक • मूल संस्कृत पाठ एवं सरल हिंदी भावार्थ ☰ ग्रंथालय में अवधूत गीता अवधूत गीता परंपरा में भगवान दत्तात्रेय से संबद्ध अद्वैत ग्रंथ है। इस अध्याय का विषय है—अखंड शिवतत्त्व। नीचे अध्याय के सभी २७ श्लोक मूल संस्कृत पाठ और सरल हिंदी भावार्थ के साथ क्रम से दिए गए हैं। पाठ और भावार्थ का संदर्भ: यहाँ आठ अध्यायों वाला २७१-श्लोक पाठ अपनाया गया है। विभिन्न संस्करणों में पाठ और श्लोक-संख्या में अंतर मिलता है। संस्कृत पाठ का मिलान संस्कृत डॉक्यूमेंट्स संग्रह से किया गया है। हिंदी भावार्थ भक्ति भावना द्वारा सरल भाषा में प्रस्तुत है; विषय-शीर्षक पढ़ने की सुविधा के लिए हैं। अद्वैत में अकर्तापन और भेदों के निषेध के कथन शुद्ध आत्मा की दृष्टि से हैं। व्यवहार में कर्तव्य, सदाचार, गुरु के प्रति सम्मान और करुणा का महत्त्व बना रहता है। अध्याय ६ • श्लोक १ बहुधा श्रुतयः प्रवदन्ति वयं वियदादिरिदं मृगतोयसमम् । यदि चैकनिरन्तरसर्वशिव- मुपमेयमथोह्युपमा च कथम् ॥ १॥ सरल हिंदी भावार्थ: श्रुतियाँ अनेक प्रकार से आकाश आदि दृश्य जगत को मृगतृष...

अवधूत गीता अध्याय 5: मन को समत्व का उपदेश — 32 श्लोक हिंदी भावार्थ सहित

भक्ति भावना • अवधूत गीता अवधूत गीता अध्याय ५ • मन को समत्व का उपदेश सम्पूर्ण ३२ श्लोक • मूल संस्कृत पाठ एवं सरल हिंदी भावार्थ ☰ ग्रंथालय में अवधूत गीता अवधूत गीता परंपरा में भगवान दत्तात्रेय से संबद्ध अद्वैत ग्रंथ है। इस अध्याय का विषय है—मन को समत्व का उपदेश। नीचे अध्याय के सभी ३२ श्लोक मूल संस्कृत पाठ और सरल हिंदी भावार्थ के साथ क्रम से दिए गए हैं। पाठ और भावार्थ का संदर्भ: यहाँ आठ अध्यायों वाला २७१-श्लोक पाठ अपनाया गया है। विभिन्न संस्करणों में पाठ और श्लोक-संख्या में अंतर मिलता है। संस्कृत पाठ का मिलान संस्कृत डॉक्यूमेंट्स संग्रह से किया गया है। हिंदी भावार्थ भक्ति भावना द्वारा सरल भाषा में प्रस्तुत है; विषय-शीर्षक पढ़ने की सुविधा के लिए हैं। अद्वैत में अकर्तापन और भेदों के निषेध के कथन शुद्ध आत्मा की दृष्टि से हैं। व्यवहार में कर्तव्य, सदाचार, गुरु के प्रति सम्मान और करुणा का महत्त्व बना रहता है। अध्याय ५ • श्लोक १ ॐ इति गदितं गगनसमं तत् न परापरसारविचार इति । अविलासविलासनिराकरणं कथमक्षरबिन्दुसमुच्चरणम् ॥ १॥ सरल हिंदी भावार्थ: “ॐ” से जिसका संकेत किया गया है, वह आकाशवत तत्त्व ऊँच...

अवधूत गीता अध्याय 4: निर्वाणस्वरूप आत्मा — 25 श्लोक हिंदी भावार्थ सहित

भक्ति भावना • अवधूत गीता अवधूत गीता अध्याय ४ • निर्वाणस्वरूप आत्मा सम्पूर्ण २५ श्लोक • मूल संस्कृत पाठ एवं सरल हिंदी भावार्थ ☰ ग्रंथालय में अवधूत गीता अवधूत गीता परंपरा में भगवान दत्तात्रेय से संबद्ध अद्वैत ग्रंथ है। इस अध्याय का विषय है—निर्वाणस्वरूप आत्मा। नीचे अध्याय के सभी २५ श्लोक मूल संस्कृत पाठ और सरल हिंदी भावार्थ के साथ क्रम से दिए गए हैं। पाठ और भावार्थ का संदर्भ: यहाँ आठ अध्यायों वाला २७१-श्लोक पाठ अपनाया गया है। विभिन्न संस्करणों में पाठ और श्लोक-संख्या में अंतर मिलता है। संस्कृत पाठ का मिलान संस्कृत डॉक्यूमेंट्स संग्रह से किया गया है। हिंदी भावार्थ भक्ति भावना द्वारा सरल भाषा में प्रस्तुत है; विषय-शीर्षक पढ़ने की सुविधा के लिए हैं। अद्वैत में अकर्तापन और भेदों के निषेध के कथन शुद्ध आत्मा की दृष्टि से हैं। व्यवहार में कर्तव्य, सदाचार, गुरु के प्रति सम्मान और करुणा का महत्त्व बना रहता है। अध्याय ४ • श्लोक १ नावाहनं नैव विसर्जनं वा पुष्पाणि पत्राणि कथं भवन्ति । ध्यानानि मन्त्राणि कथं भवन्ति समासमं चैव शिवार्चनं च ॥ १॥ सरल हिंदी भावार्थ: अखिल आत्मस्वरूप में किसी अलग देवता क...

अवधूत गीता अध्याय 3: ज्ञानामृत की समरसता — 46 श्लोक हिंदी भावार्थ सहित

भक्ति भावना • अवधूत गीता अवधूत गीता अध्याय ३ • ज्ञानामृत की समरसता सम्पूर्ण ४६ श्लोक • मूल संस्कृत पाठ एवं सरल हिंदी भावार्थ ☰ ग्रंथालय में अवधूत गीता अवधूत गीता परंपरा में भगवान दत्तात्रेय से संबद्ध अद्वैत ग्रंथ है। इस अध्याय का विषय है—ज्ञानामृत की समरसता। नीचे अध्याय के सभी ४६ श्लोक मूल संस्कृत पाठ और सरल हिंदी भावार्थ के साथ क्रम से दिए गए हैं। पाठ और भावार्थ का संदर्भ: यहाँ आठ अध्यायों वाला २७१-श्लोक पाठ अपनाया गया है। विभिन्न संस्करणों में पाठ और श्लोक-संख्या में अंतर मिलता है। संस्कृत पाठ का मिलान संस्कृत डॉक्यूमेंट्स संग्रह से किया गया है। हिंदी भावार्थ भक्ति भावना द्वारा सरल भाषा में प्रस्तुत है; विषय-शीर्षक पढ़ने की सुविधा के लिए हैं। अद्वैत में अकर्तापन और भेदों के निषेध के कथन शुद्ध आत्मा की दृष्टि से हैं। व्यवहार में कर्तव्य, सदाचार, गुरु के प्रति सम्मान और करुणा का महत्त्व बना रहता है। अध्याय ३ • श्लोक १ गुणविगुणविभागो वर्तते नैव किञ्चित् रतिविरतिविहीनं निर्मलं निष्प्रपञ्चम् । गुणविगुणविहीनं व्यापकं विश्वरूपं कथमहमिह वन्दे व्योमरूपं शिवं वै ॥ १॥ सरल हिंदी भावार्थ: निर्...

अवधूत गीता अध्याय 2: गुरु, विवेक और आत्मानुभव — 40 श्लोक हिंदी भावार्थ सहित

भक्ति भावना • अवधूत गीता अवधूत गीता अध्याय २ • गुरु, विवेक और आत्मानुभव सम्पूर्ण ४० श्लोक • मूल संस्कृत पाठ एवं सरल हिंदी भावार्थ ☰ ग्रंथालय में अवधूत गीता अवधूत गीता परंपरा में भगवान दत्तात्रेय से संबद्ध अद्वैत ग्रंथ है। इस अध्याय का विषय है—गुरु, विवेक और आत्मानुभव। नीचे अध्याय के सभी ४० श्लोक मूल संस्कृत पाठ और सरल हिंदी भावार्थ के साथ क्रम से दिए गए हैं। पाठ और भावार्थ का संदर्भ: यहाँ आठ अध्यायों वाला २७१-श्लोक पाठ अपनाया गया है। विभिन्न संस्करणों में पाठ और श्लोक-संख्या में अंतर मिलता है। संस्कृत पाठ का मिलान संस्कृत डॉक्यूमेंट्स संग्रह से किया गया है। हिंदी भावार्थ भक्ति भावना द्वारा सरल भाषा में प्रस्तुत है; विषय-शीर्षक पढ़ने की सुविधा के लिए हैं। अद्वैत में अकर्तापन और भेदों के निषेध के कथन शुद्ध आत्मा की दृष्टि से हैं। व्यवहार में कर्तव्य, सदाचार, गुरु के प्रति सम्मान और करुणा का महत्त्व बना रहता है। अध्याय २ • श्लोक १ बालस्य वा विषयभोगरतस्य वापि मूर्खस्य सेवकजनस्य गृहस्थितस्य । एतद्गुरोः किमपि नैव न चिन्तनीयं रत्नं कथं त्यजति कोऽप्यशुचौ प्रविष्टम् ॥ १॥ सरल हिंदी भावार्थ: ग...