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महामृत्युंजय मंत्र — अर्थ, महत्व, जप विधि और धार्मिक मान्यताएँ | शिव भक्ति

॥ ॐ नमः शिवाय ॥ महामृत्युंजय मंत्र मंत्र • अर्थ • महत्व • जप विधि भगवान शिव को समर्पित महामृत्युंजय मंत्र वैदिक परंपरा का अत्यंत प्रसिद्ध मंत्र है। इसे त्र्यम्बक मंत्र भी कहा जाता है। श्रद्धालु इस मंत्र का जप भगवान शिव की उपासना, मानसिक शांति, साहस और आध्यात्मिक शक्ति की कामना से करते हैं। महामृत्युंजय मंत्र ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥ महामृत्युंजय मंत्र का सरल अर्थ हम तीन नेत्रों वाले भगवान शिव की उपासना करते हैं, जो जीवन को सुगंधित करने वाले और पोषण प्रदान करने वाले हैं। जिस प्रकार पका हुआ फल अपने बंधन से सहज रूप से अलग हो जाता है, उसी प्रकार प्रभु हमें मृत्यु के भय और सांसारिक बंधनों से मुक्त करके अमृतस्वरूप आध्यात्मिक कल्याण की ओर ले जाएँ। महामृत्युंजय मंत्र का महत्व सनातन परंपरा में महामृत्युंजय मंत्र भगवान शिव की आराधना का विशेष मंत्र माना जाता है। इसका भाव केवल सांसारिक भय से मुक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि साधक को अपने भीतर निर्...