करवा चौथ — व्रत कथा, पूजा विधि, चंद्रमा को अर्घ्य और धार्मिक महत्व
करवा चौथ — व्रत कथा, पूजा विधि, चंद्रमा को अर्घ्य और धार्मिक महत्व करवा चौथ क्या है? करवा चौथ हिंदू परंपरा का प्रसिद्ध व्रत-पर्व है। यह कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी से जुड़ा है। विशेष रूप से उत्तर और पश्चिम भारत के अनेक परिवारों में विवाहित महिलाएँ पति के मंगल और दीर्घायु की कामना से व्रत रखती हैं। परिवार और क्षेत्र के अनुसार इसकी विधि में अंतर मिलता है। करवा चौथ का धार्मिक महत्व इस व्रत का मुख्य भाव दांपत्य जीवन के मंगल, प्रेम, विश्वास, समर्पण और परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना है। आधुनिक परिवार अपनी आस्था और स्वास्थ्य की परिस्थिति के अनुसार परंपरा का पालन करते हैं। करवा चौथ नाम का अर्थ “करवा” मिट्टी के छोटे पात्र या कलश के लिए प्रचलित शब्द है और “चौथ” चतुर्थी तिथि की ओर संकेत करती है। पूजा में करवे का विशेष स्थान होने के कारण यह नाम प्रसिद्ध हुआ। करवा चौथ की प्रचलित व्रत कथा करवा चौथ से अनेक लोककथाएँ जुड़ी हैं। सबसे प्रसिद्ध कथाओं में वीरवती की कथा सुनाई जाती है। लोकपरंपरा के अनुसार वीरवती ने कठोर व्रत रखा। उसके भाइयों ने उसकी कठिन अवस्था देखकर छलपूर्वक चंद्रमा निकलने...